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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१७०

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सब धर्म समान हैं, तब आप अपनी और नाभिविलमेसे क्यों नहीं पढ़ते' भिस बातसे भी लिखनेवाले भाभीका भन्ज्ञान जाहिर होता है । ये मेरे खुस चयानको नहीं जानते, जिसमें मैने भजनावली किस तरह तैयार हुआ । आश्रम और प्रन्यसाहबमेसे भी काफी भजन लिये गये हैं । खुशहाल निराश्रित बताया था कि पूरी जनावलीमें वाअिविल अन भाभीकी तीसरी शिकायत यह है कि 'आपके पढे चढे काग्रेसी नेता पश्चिम पंजाव या पश्चिम पाकिस्तानके दूसरे किसी हिस्सेको छोड़कर यहाँ आये है । लेकिन यूनियनमें ने शरणार्थियोंकी तरह रहकर दूसरे झरणार्थियोंकी कठिनाजियों और मुसीबतोंमें साथ नहीं देते। पाकिस्तान में सुनके पास जैसी हवेलियाँ थी, सुनले ज्यादा अच्छी हवेलियों सुन्होंने यहाँ ले ली है और सुनमें मौजसे रहते हैं । ये काग्रेसी नेता सुन शरणार्थियोंसे विलकुल अलग रहते हैं जिनके पास न तो रहनेफे मकान हैं न सदसि वचनेके लिये गरम कपडे । गरम कपड़ों की बात तो दूर रही, बहुतसोंके पास बदलनेके लिये दूसरे कपडे तक नहीं है। नन्हें अच्छा खाना भगस्टर होता है । अगर यह शिकायत सच है, तो यह हालत गर्मनाक है । मैने तो अपनी प्रार्थनासभाभों में साफ शब्दों में झुन बनी शरणार्थियोंकी निन्दा की है, जो गरीब घरमार्थियों के साथ सुखीपतें झुठानेके बजाय का साथ छोकर मौज मारते है | यह धर्म नहीं, अधर्म है । धनियोंको अपने गरीब भाजियोंके सुख-दुखमें साथ देना चाहिये । 1 दिल्ली में मेरा फर्ज़ 1 जिसके बाद सुन भाभीने मुझे यह ताना मारा है कि आप पाकिस्तान जानेका मिरादा रखते थे, लेकिन अभी तक गये नहीं । यहाँ दिल्ली में आपका क्या काम है आप दुखी हिन्दुओं और सिक्खोंकी मदद करनेके लिये पाकिस्तान जानेके बजाय अपने मुसलमान दोस्तोंकी मदद करना क्यों ज्यादा पसन्द करते है । लेकिन शिकायत करनेवाले ગુજર