शाकाहारकी गृनियाँ समझायें और अपने जीवन खुनपर अमल करके दिसायें। दूसरोंको अपनी गया बनाने और कभी गुनहला गस्ता नहीं है । अपने घरोंमें जमे रही I हुआ नीमका मायकाट करें मुसलमानोंखे जिन्होंने देता है और दूसरोंको अक हिन्दू टीकाकार कहते है आप और आप-जैसे दूसरे लोग मुसलमानांसे यह सुपदेश देते नहीं थकते कि सुनकी जिसे लाजमी तौरपर पैदा होनेवाली मुखीयतोंके चावजूद वे अपने घर न छोटे-भले सुन्हं सलामतीसे भी अमाप मांस क्यों न मिले। अगर सुखलनान आपके कहे मुतानिक अपने मोहल्लों जने रहे, तो वे काट डाले जानके डरसे रोजी स्थानेके लिये मोहल्लेसे बाहर नहीं लि सर्प लेती हालतमै वे सायें क्या है यह भी अंदेशा है कि बहुत ज्यादा तादाद हिन्दू, मुसलमानोफी की मेहनत से बना और अन्हें भूतों मरना पडे । यत्रे हुने गरी अपनी आँखोंसे अपने कभी भाभियोंको ved पाकिस्तान जाते देखा है, सूपरकी अमुविधाओंके बावजूद अपने घ ठहरनेकी आगा रसना ज्यादती है।' मे कबूल करता हूँ कि मिस टोका बहुत सच्चा है। लेकिन में मुन्हें दूसरी को भी सलाह दे नहीं सकता। मेरा विचार है कि अपना घरबार छोड़नेसे मुमलमानोंको ज्यादा तकलीफ हो सकती है। अिसलिये मेरा यह सख्या विश्वास है कि अगर बचे डुभे मुसलमान सुखीवर्ते सहते हुआ भी भीमानदारी और बहादुरीते अपने घरोंमें जमे रहेंगे, तो ये जरूर अपने हिन्दू पड़ोसियों व दिलों को पिघला सकेंगे। हिन्दुस्तान के दोनों हिस्सोंमे दूसरोको भी मुसीवत्तोसे जरूर छुटकारा मिलेगा। क्योंकि अपर मुसलमान पड़ी तादाद में पूरी श्रीमानदारीके साथ अहिंसासे पैदा होनेवाली बेमिसाल बहादुरी दिखायें, तो मदर का असर सारे हिन्दुस्तानपर पड़ेगा । अहिसा पक्का विश्वास भेक बूमरे खतमें मुझे मिसलिओ फटकारा गया है कि ि चर्चिल, हिटलर, मुसोलिनी और जापानियोंको जैसे वक्त अपना अहिलक तरीका अपनानेकी सलाह दी, जब सुनके सामने जीवन मरणकी समस्या १४८
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