५६ सांड्रीमरोड़ी हुआ बातें ६-११-२४७ प्रार्थनाफे बाद गाधीजीने अक दोस्त द्वारा नेगीं हुआ अखवारोको. दो warata fae करते हुये कहा में लेखकका नाम जानता हूँ, लेकिन में न तो खुला नाम बताना चाहता और न हुन लेखोंका ब्योरा ही देना चाहता हूँ। मैं सिर्फ मितना ही कहना चाहता हूँ कि हिन्दू धर्मकी सेवा करनेके खयालसे लिखे गये हैं। लेकिन सुनमें जानबूझकर झूठी बातें कही गयी हैं। जब नभी बातें नहीं कही जाती, सो हतोको तोडमरोड पर पेश किया जाता है। लेकिन मैं यह रहने की हिम्मत करता हूँ कि असा करनेसे को भी मकसद पूरा नहीं होता - धर्मका तो बिलकुल नहीं। जय मिलजामोंकी बुनियाद सन्यामी पर नहीं बल्कि झूठपर होती है, तब जिनपर मिलजाम लगाया जाता है सुन्हं को भी चोट नहीं पहुँचती । भिसलिये मै जनताको चेतावनी देता हूँ कि वह जैसे असयाका समर्थन न करे, भले खुलके लेखक कितने ही मगहूर क्यों न हों । कण्ट्रोल हटा दिये जायें वरान मंत्रीने गैरसरकारी लोगोंकी जो कमेटी बनानी थी सुसने अपनी रिपोर्ट झुनके मामने पेम कर दी है। झुस कमेटीकी सिफारिशों पर कोभी फैसला करनेनें डॉ० राजेन्द्रप्रसादको मदद देनेके लिये सूचोंके जो मन्त्री या सुनके प्रतिनिधि दिल्ली आये थे, खुनसे में मिला था । जब मैंने मिस मीटिंगके बारेमें सुना, तो मैने डॉ० राजेन्द्रप्रसादसे कहा कि मैं मुझे सुन लोगोंके सामने अपनी बात रखनेका मौका दें, ताकि में झुनके शकोंको दूर कर सकूँ क्योंकि, मुझे मिसका पूरा भरोसा है कि अनानका कण्ट्रोल हटानेकी मेरी राय विलकुल ठीक है। डॉ० राजेन्द्र- १५१
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