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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१७९

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गाधी हर ५७ ase after दौरा मनाये हुये 0-11-183 के न मिलने गये थे। वहीं न्हें झुम्मीद से ज्याer as a tear पनि लौटनेपर सीधे प्रार्थनासभा टे गये। fare गांधीजीने अपने हॉरेग विक्र करते हुआ कहा, मुझे डस होता है कि देर र शुरुके उसके सलमानको विश्व ही पड़ रही हैं। सुननेसे बहुतसे जमीनों माल है, लेकिन नवाये जाने मे ने अपनी जमीन जोत हीं पाते। न्होंने अपने मवेशी, हल और घूमरा सामान क्षेत्र टाल है। गैर रही है। दो हजारसे सूपरकी तादाद को लोग मेरे आसपास लिच्छे हुने थे, न्होंने अपने अनुभाको भारत चाहते हैं, क्योंकि वहाँ जीना दोस्त और रिश्तेदार पाकिस्तान ते न्हा कि हम, पाकिस्तान जाना हो गया है। हमारे महुदने भी नरकार हमें जल्दी जल्दी लाहोर नेम दे, तो है। जिसटि, दया होगी। ह मैके लोगोंके खिलाफ कोमी शिवत नहीं है। ★ टेकी सभाका पूरा कान करने नहीं दूंगा। महा कि मेरे हायने कभी खुमान नत्र और पहुँचा दूँगा ! मुझसे कहा गया है लेकिन भागका म सुन लोगों का देहा धान मंत्री ने हमंत्री भी हैं, सत्ता नहीं है, अक सबक के शरणार्थी लोग दिल्ली क्षेत्र समस्या गये हैं। मुझे बताया गया है कि चूंकि पाकिस्तानने शरणार्थिक बाथ जुन किये गये हैं सिलिये यह मानते हैं कि मुन्हें कुछ खास हक हासिल है। वज्र से दूकानपर कोभी सामान खरीदने जाते १५४