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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१८४

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दौरा किया करती हैं, अलग अलग छावनियोंमें शरणार्थियोंसे मिलती हैं, बीमारों और दुखियोंको देखती है और मिस तरह जितना भी ढादस सुन्हें बँधा सकती हैं बँधानेकी कोशिश करती हैं। अब वह कुरुक्षेत्र- छावनी देखने गभीं, तो झुनसे लोगोंने पूछा कि गाधीजी कव आयेगे । लेही माण्डवैउनके सामने जितने लोगोंने मुझे देखनेकी अिच्छा जाहिर की कि सुन्हें पूरी झुम्मीद हो गी कि मे कुरुक्षेत्र- छाननीका मुआमिना करने जरुर जालूँगा । की इन्हें भरोसा दिलाया कि आपका भैसी झुम्मीद रचना बिलकुल ठीक हैं। सच पूछा जाय, तो मैंने पानीपत जानेका बन्दोबस्त कर लिया है, जहाँ के हिन्दू और मुसलमान दोनों मुझसे मिलने के लिये बड़े है । शुसी दौरेमें मैंने कुरुक्षेत्रके दौरेको भी शामिल करनेकी बात सोची थी । लेकिन मुझे पता चला है कि पानीपतके दौरेम कुस्प्रेश्रावनीको शामिल नहीं किया जा सकता | मिसळ अखिल भारतीय काप्रेस कमेटी की अगली मीटिंगके खतम होने तक करक्षेत्रका दौरा मुलतवी रखना जरुरी हो गया है। फिर भी मुझे यह सुझाया गया है कि कुरुक्षेत्र-जैसे बडे भारी कैम्पन लानुअस्पीकरका arateer करना कठिन काम है। लेकिन कैम्पके लोगोंसे रेडियोपर बोलनेमें कोओ कठिनाभी नहीं होगी, बशर्ते जरूरी सम्बन्ध जोखनेवाली मशीन कैम्पमे लगा दी जाय । जैसा बन्दोवस्त हो जानेपर में मंगल या बुधको कुरुक्षेत्र- छावनीके लोगोंको अपनी बात सुना सकूँगा और वादन सुनसे मिलने भी आ सकूँगा । जिबी बीच अम्मीद है कि मे अपना पानीपतका दौरा खतम कर लूँगा । १५९