कि हमारे दुःखोंसे आपके दिलको महरी चोट लगी है और आप चाहेंगे कि सारा हिन्दुस्तान मिस मौकेपर खुशियाँ न मनावे । आपकी जिस हमदर्दी के लिये हम आपके अहसानमन्द है । यह सच है कि आपका दिल रंज और गमसे भरा हुआ है, फिर भी मे चाहती हूँ कि आप सय कारणार्थियों और हिन्दुस्तानके दूसरे सारे लोगोंको जिस त्योहारपर खुशी मनानेके लिये कहे और धनी लोगों से अपील करें कि वे गरीबोंको मदद दें । भगवान हम सबको भैसी समझ और बुद्धि दे कि हम आजादीके बाद आनेवाले सारे त्योहारोंपर खुशियाँ मना सकें 1 " हालाँकि मैं अिन चहनको और जिनके जैसे दूसरे लोगों की तारीफ करता हूँ, फिर भी मे यह कहे बिना नहीं रह सकता कि वह और झुनके जैसे नोचनेवाले लोग गलत रास्तेपर हैं । भिसे सब जानते हैं कि जो परिवार बहुत दुखी होता है, वह भरसक त्योहारोंकी खुशियोसे अलग रहता है। यह भेक्ताके सुमलको बहुत छोटे पैमानेपर माननेका चेक मुदाहरण है । मिस सीमाको तोड़कर बाहर निकलिये और सारा हिन्दुस्तान भेक परिवार वन जाता है। अगर सारी सीमा में खतम हो जायें, तो समूची दुनिया क्षेत्र परिवार बन जाय, कैसी कि वह सचमुच है । अिन बन्धनों और सीमाओंको सोखकर बाहर न निकलनेका अर्थ होगा दया, ममता, प्रेम और सहानुभूति वगैराकी झुम्दा भावनाओंसे खुदासीन रहना । ये भावनायें ही आदमीको आदमी बनाती है। न तो हमें दूसरोंके दुखदर्द की अपेक्षा करके अपने स्वार्थमें ही मस्त रहना चाहिये और न गलत तौरपर भावुक नकर हकीकतोंकी सुपेक्षा करनी चाहिये । दीवालीपर खुशियाँ न मनानेकी मेरी सलाह बहुतसी ठोस दलीलोंकी बुनियादपर खड़ी है। शरणार्थियोंके खानेपीने, पहनने ओढ़ने, रहने और कामधन्धेका सवाल हमारे सामने है, जिसका असर लाखो हिन्दू, सिक्ख और मुसलमान शरणार्थियोंपर पड़ रहा है। देशमें खुराक और पी तगी भी है, हालांकि वह बनावटी है । जिनसे भी गहरा कारण है बहुतसे से लोगोंकी नेभीमानी, जो जनताको रंगपर असर डाल सकते १६१
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