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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१८९

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हैं। मध्यक्रीयेरि भन्ने मे और शाम here frames A बचपन है कि ये । वि सुकम और मिजाज गैर भी निमे अन पानीपतका मुआजिना होनेके पीछे जिना मारा भो चाहता है । t कुकी थी और मैं अपनी आप अपने हो भन्न है। आजा मेरे नहीं सरना था । मुझे गुण है कि पा गया या । यह अस्पत शुमलमान गीतोंको देवा । रे हैं, नगर सुपर जहाँ free varta. क्योंकि राजकुमारी चार डॉक्टर और रीमा यहाँ भेजे है। जिस दलमान हिन्दुओं और नाभिन्दोंसे मिले। यहाँ शार्थियोकी तादाद हार पर जाती है। हमसे या वे रोजाना ज्यादा ज्यादा दादने आ को भग जा रहे हैं, जिससे वहाँके डिप्टी और पुलिस यह बतलाने ही होती है कि asaana दोनों बहुत सारी स्टे मन होता है। मुझे दोनों अफसरोंकी हिन्दू और है, और नरणार्थियों तो कहना ही नहीं । हैं ही। मने म्युनिसिपल भवन के पास जमा हुआ शरणार्थियोंने भी हम लोग मिल सके | पाकिस्तान में और पानीपतके अव्यवस्थित जीवन में धरणार्थियों भयानक मुसो सुठानी पडी और झूठानी पड़ रही हैं। सुनते ૧૪