कुको रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मपर रहना पड़ता है और बहुतसोंको आसमान के नीचे बिलकुल खुलेमें रहना पर रहा है, फिर भी सुनके मन में और चेहरोंपर जरा भी गुस्सा न देखकर मुझे वही खुशी हुआ । हमारे यहाँ जानेसें वे लोग बड़े खुश हुये । पानीपतके डिप्टी कमिश्नर था दूसरे लोगोंको पहलेसे सूचना किये बिना मितने शरणार्थियोंको पानीपत में भिकने कर देना मुझे अधिकारियोंकी बेरहमी मालूम हुभी । पानीपतके अफसरोंको शरणार्थियोंकी सच्ची तादाद राय मालुम हुआ जब ट्रेनें स्टेगनके प्लेटफार्मपर आकर स्कों । यह सबसे बड़ी बदकिस्मतीकी बात है । पानीपत के शरणार्थियोंम औरतें, बच्चे और वृढे भी हैं। मुझे यह बताया गया कि नरणार्थियोंमें असी औरते भी हैं जिन्हें स्टेशनके प्लेटफार्मोॉपर बच्चे पैदा हुने । डॉ० गोपीचन्द 1 यह सब पूरवी पंजाव हो रहा है, जिसके प्रधान मन्त्री डॉ० गोपीचन्द है । डॉ० गोपीचन्द मेरे साथी कार्यकर्ता है । मैन्हें बहुत नानता हूँ। मै बरसोंसे न्हें अक योग्य संयोजकके नाते जानता हूँ, जिनका पजाबियोंपर वडा प्रभाव है । सुन्होंने हरिवन-सेवक संघ, अखिल भारत-चरजा-संघ और अखिल भारत-श्रामोद्योग संघके लिये काफी काम किया है। मुझे यह नहीं सोचना चाहिये कि पूर्व पंवाका काम झुनकी ताकतके बाहर है । लेकिन अगर पानीपत सुनकी कार्यकुशलताका नमूना हो, तो यह सुनकी सरकारके लिये बडी यदनामीकी बात है। पहलेसे बिना सूचना दिये जितने शरणार्थी पानीपत में क्यों सुतारे गये ? सुन्दे ठहराने for a नाकाफी बन्दोवस्त क्यों है ? अफसरोंको पहलेसे ही यह सूचना क्यों नहीं बी जानी चाहिये थी कि कौन और कितने धरणार्थी पानीपत मेने जा रहे है ? मुसके साथ ही कल मुझे यह भी सूचना मिली है कि गुडगाँव जिलेमें तीन लाख असे मुसलमान हैं, जिन्होंने सरकर अपना घरबार छोड दिया है। वे भाम सबके दोनों तरफ खुलेसें मिस आगासे पढे हैं कि सुन्हें अपने औरत, बच्चों और मवेशियोंके साथ जानकी की सर्दीमि तीन सौ मीलका रास्ता तय करना है । मै 2 १६५
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