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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१९२

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गये हमले और हिंसाको रोका जाय ।" सुनका यह भी कहना है कि जूनागढ के नवाच या यहाँके दीवानको हिन्दुस्तानी संघके साथ किसी तरहका अस्थायी या स्थायी समझौता करनेका कानूनी हक नहीं है पाकिस्तानकी राय में हिन्द सरकारने यह कार्रवाभी करके " पाकिस्तानकी सीमाको साफ चाफ चौघा है और मिस तरह अन्तरराष्ट्रीय कानून भग किया है । यूनियनमें प्रवेश कल अखबारों में खो बयान निक्के हैं झुनको देखते हुये मिस मामलेमें न तो मुझे अन्तरराष्ट्रीय कानूनका भंग माछम होता और न यूनियन सरकारकी रियासतपर कब्जा करनेकी कोभी वात दिखामी देवी । जहाँ तक मे समझ सकता हूँ, जूनागरकी जनताकी तरफसे वहाँकी आरजी हुकूमतने जो आन्दोलन किया मुसमें मुझे को भी गैरकानूनी चीज नहीं दिखाओ देती । यह जरूर है कि काठियावाडके राजाओंकी बिनतीपर सारे काठियावाडकी सलामती के लिये यूनियन सरकारने अपनी फौजोंकी मदद मेजी 1 भिसलिये मुझे मिस सारी कार्रनाभमें कोमी गैरकानूनीपन नहीं दिखाओ देता । जिसके खिलाफ जूनागढ के दीवानने जुड़े तौरपर अपनी राय बदलकर जो कुछ किया वह गैरकानूनी था । भिस सारे मामलेको मे मिस नजरसे देखता हूँ - जूनागढ के नवाब साहबको अपनी प्रजाकी मंजूरीके बिना, जिसमें मुझे बताया गया है कि ८५ फी सदी हिन्दू हैं, पाकिस्तानमें नामिल होनेका कोभी हक नहीं था । गिरनारका पवित्र पहाड और खुलके सारे मन्दिर जूनागढका भेक हिस्सा हैं । सुपर हिन्दुओंने वहुत पैसा खर्च किया है और नारे हिन्दुस्तानसे हजारों यात्री गिरनारकी यात्राके लिये वहाँ जाते हैं। आजाद हिन्दुस्तानमे वारे देशपर मनताका अधिकार है। मुसका जरासा भी हिस्सा खानगी तौरपर राजाओंका नहीं है। जनता के ट्रस्टी बनकर ही वे अपना दावा कायम रख सकते हैं और जिसलिये झुन्हें अपने हरओक कामके लिये जनताके समर्थनका सबूत पेश करना होगा । यह सच है कि ममी राजा नवाबोंने यह समझा नहीं हैं कि वे प्रजाके १६७