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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१९९

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अगर सुनके मुखिया गमेसी अपने दिलोंन भगवान के बजाय शैतानको रखते हूं, तो चे प्रेमके प्रति वफादार नहीं है । शरणार्थियोंका लोटना अ० भाभी० सी० सी० के सामने से जानेराळे प्रस्तावोंपर वर्किंग कमेटीने पूरे तीन घण्टों तक नच मे । चर्चानि यह माल झुठा कि किम तरह अता यातावरण पैदा किया जाय, जिससे सारे हिन्दू और सिक्a धरणार्थी जिज्जत और हिफाजत के साथ पदम जानें अपने अपने घरोंको लौटाये जा सकें। वे जिम नतीजेपर पहुँच क बुराभी पाकिस्तान से ही गुरु हुआ । नगर सुन्होंने यह भी महल दिया कि अब घड़े पैमानेपर मधुराकी नक् की गी और हिन्दुओं और निक्सने पूर्व पजाद और get a ने यूनियन के हिस्तोमें भयर यदले लिये, तो राजकी शुरआत यह सवाल फ पड़ गया | अगर अ० आ० वी० सी० विश्वामके साथ यह कह सकती कि जहाँ तक यूनियनका सम्बन्ध है, पागलपनके दिन बीत गये और यूनियन ओक सिरेसे दूसरे सिरे तक सब लोग समझदार छन गये हैं, तो पूरे विश्वासके साथ यह भी कहती थी कि पाकिस्तान डोमिनियनको हिन्दू और सिक्ख शरणार्थियोंको भिजत और पूरी हिम्मतके साथ अपने यहाँ पास बुलानेके लिये लाचार होना पड़ेगा। यह हालत निर्फ तभी पैदा की जा सकती है, जब आप लोग और दूसरे हिन्दू और सिक्ख रावण या शैतानके बदले राम यानी भगवानको अपने दिलों में बसा लें। क्योंकि जब आप नैवामको अपने दिलोंसे हटा देंगे और भमके पागलपनको छोड़ देंगे, तब हरनेक मुसलमान बच्चा भी यहाँ सुतनी ही आजादीसे घूमफिर सकेगा, जितनी आवासे येक हिन्दू या सिक्का बच्चा घूमता है । जिसमे मुझे कभी शक नहीं कि तब जो मुसलमान शरणार्थी लाचार होकर अपने घर छोड़ गये हैं, वे खुशीसे लौटी और तव हरमेक हिन्दू और सिक्स शरणायकि हिफाजत और जिज्जतर्फे साथ पाकिस्तानमें अपने घर लौटनेका रास्ता साफ हो जायगा । क्या मेरे शब्द आप लोगोंके दिलोमें गूँज सकेंगे और में० भाभी. सी० सी० समझदारी और मिन्साफभरा फैसला कर सकेगी ? १७६