६७ हिन्दुस्तान और दक्षिण अफ्रीका 90-93-180 इल में रामपुर और अपने सुन देवभाजियोके यारेनें बोला था. में है । मुझे लगता है कि आज मुझे दूसरे विषय जो दक्षिण पर ज्यादा खलल ना चाहिये। मेलिना १८९३ १९१४ तक करीब बीन बरस रहा हूँ । उत्रे भरलेनें जब के मेरा जीवन चन रहा था, शायद ओक ही साल में बाहर रहा हो मूंग । सुल दरानेचान में सिर्फ हिन्दुस्तानियोंके ही नहीं पाक सुन गोरे लोगों के गहरे सम्वन्धने भी नाचा, जो हिन्दुस्तान जैसे सुन पड़े देशमें भार बस गये हैं । स म त अगर दक्षिण मागे बढ़ा है, तो हिन्दुस्तानने दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की की है। जो क्ल तक असम्भव मदन होता था वह आज बन गया है । यहीं के कारन जानेकी आवश्यकता नहीं । नाम ही पद है कि हिन्दुस्तान ब्रिि कामनवे (राष्ट्रसह ) में आ गया है वही है, जो दक्षिण यानी सुला वा बिलकुल है। क्या पनिवेशके लोगोंको ओशियाची राष्ट्र भाज गाविल होता है । दूसरे सुरनिवेशनें गुलान माना जाना चाहिये ! ओ ब्रिटिश राष्ट्र सहने पहली दफा र सदस्योंकी नरसी राष्ट्रसमूहमें हिन्दुस्तान देखिये कि भावना सातक डॉ० शे० पी० दलि हिन्दुस्तान के ब्रिटिश राष्ट्रनहरें शामिल होनेके पाँच दिन बाद उनकी नेटra rusa aeको क्या उन्देश प्रेमा या । सुन्होंने लिखा था. "क्योंकि आप नये सुपानदेशाचे नमी आजादीका दिन नना रहे हैं, जो आपके विचार हिन्दुस्तान जितिहालने वा दिन है, जिसलिये में गाया करता हूँ कि दक्षिण अश १८२
पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२०५
दिखावट