हिन्दुस्तानी अपने आप नये सुपनिवेशों में चले जायेंगे और वहाँ जाकर भुस सन्देशका प्रचार करेंगे जो सुन्द दक्षिण अफ्रीका में लिखाया गया है, यानी वहाँ जाकर वे लोगोंको शान्ति और व्यवस्थासे रहना और सुन मजहबी झगड़ोंसे बचना सिखायेंगे जिनकी वजह से आज हिन्दुस्तानमें हजारों लोग मारे जा रहे हैं। " रंगद्वेष 19 यह बात ध्यान देने लायक है । डॉ० बनकी भिल बातसे साफ़ मालूम होता है कि न्हें जिसमें शक है कि हिन्दुस्तान के ब्रिटिश राष्ट्रसमूह में शामिल होनेका दिन नया दिन था । और फिर में नेटाक कामेसको यह यिनमॉगी सलाह देते हैं कि "दक्षिण अफ्रीका हिन्दुस्तानियों को हिन्दुस्तान चले जाना चाहिये और वहाँ इस सन्देशका प्रचार करना चाहिये जो इन्हें दक्षिण अफ्रीका में सिखाया गया था, यानी शान्ति और जच्तसे रहना और मजहवी दंगों से बचना | मुझे दवा डर है कि दक्षिण अफ्रीकाका औसत गोरा आदमी हिन्दुस्तानके बारेमें किसी तरह सोचता है । जिसीलिये वहाँ हमारे देशवासियोंके रास्तेमें तरह लड़के करेंगे उगाये जाते हैं। शुनका दोष यहीं है कि वे भेशियाके हैं और झुनका रंग काला है। मे दक्षिण अफ्रीका सबसे आला यूरोपियन लोगोंसे यह प्रार्थना करता हूँ कि वे अशिया के खिलाफ और काले के खिलाफ अपनी जिस द्वेषभरी भावनापर फिर बिचार करें और से सुधारें । सुनके बीच अफ्रीका हब्जियोंकी बहुत बडी आबादी पड़ी है। कुछ बातों हनियोंके साथ भेशियावालोंसे भी बदतर बरताय किया जाता है। मैं वहाँ जाकर बस जानेवाले यूरोपियनोंसे जोर देकर यह कहूँगा कि वे जमानेको पहचानें । या तो सुनका यह रंगद्वेष विलकुल गलत है, या फिर अग्रेजों और ब्रिटिश कामनवेल्थके दूसरे मेम्बरोंने मेशियायी देशको कामनवेल्थ मेम्बर बनाकर भैसी गलती की है जो माफ़ नहीं की जा सकती । धर्माको आजादी मिलने ही वाली है। और क्का भी जल्दी ही राष्ट्रसमूहका मेम्बर बन जायगा । लेकिन जिसका मतलब क्या है? मुझे सिखाया गया है कि राष्ट्र- समूहका मेम्बर होना आजादीसे बढकर नहीं तो कमसे कम सके १८३
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