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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२०८

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से जनताकी आवाज ड्व जायगी ? हमारे मंत्री, जो कि जनतामेसे चुने गये हैं और जनताके हैं, अच्छी तरह जानते हैं कि जिन दफ्तरी माहिरोंने सिविल नाफरमानीके वक्त अन्हें कितना बडा नुकसान पहुँचाया है । कितना अच्छा हो, अगर वे भाज मिन माहिरौनी बात सुननेके बजाय जनता की भावाजको सुनें । झुन दिनों जिन माहिरोंने पूरी हुकुमत की थी । क्या आज भी शुन्द मा हो करना चाहिये ? क्या लोगोको गलतियाँ करने और झुनसे सबक लेनेका कोभी मौका नही दिया जायगा ? क्या मंत्री यह नहीं जानते कि सुन सुदाहरणानसे, जिन्हें में नीचे दे रहा हूँ, अगर किसी भेम्मै कण्ट्रोल हटानेसे जनतासे नुकसान पहुंचे, तो वे कितनी शाक्त रखते है कि सुमपर फिरसे ण्ट्रोल रुगा सकते है ? फण्ट्रोलॉकी जो फेहरिस्त मेरे सामने है ससे मेरे-गंगा चाच आदमी तो हैरान हो जाता है। सुनमेंसे कुछमे अच्छा होती है । मैं तो सिर्फ भितना ही कहता हूँ कि अगर ण्ट्रोलोंकी साभिन्न नामकी कोजी चीज है, तो मुझे ठण्डे दिलसे जॉचना होगा । असके बाद लोगों को जिस पातकी तालीम देनी होगी कि आम कण्ट्रोलका क्या मतलब है और व्यास खास चीजोपरके कण्ट्रोलका क्या अर्थ है। जो फेहरिस्त मुझे मिली है की चाभीकी जाँच किये बगैर, भुसमेसे कुछ नमूने निमलकर नीचे देता हूँ अक्मवेजपर, दपवा लगानेपर, केपिटल भिन्दयोरेन्नपर, बैंककी भागा चोलनेपर, जिन्दयोरन्नमें पैसा लगानेपर, मुत्रुके बाहर जाने और अन्दर आनेवाली हर किमकी श्री जॉपर, अनाऊपर, स्वीनीपर, गुरु, गया और अर्धतपर, वनस्पतिपर, कमदेपर जिनमे गरम कपदा भी शामिल हैं, पायर अल्कोहलपर, पेट्रोल और निट्टीके तेलपर, कागजपर, सीमेण्टपर, फौलादपुर, भोरपर, मँगनीजपर, कोयलेवर, दुला भीपर, मशीनरी लगाने और पेस्ट गोलनैपर, कुछ सूत्रोंमें मोटर बेचनंदर और चाबकी शेतीपर 1 १८५