यन्दोवस्त हो सके, तो वहाँके मुसलमान लाचार होकर पाकिस्तान चले आयें। पिछली बार जब मे पानीपत गया था, तब मुझसे कहा " गया था कि वहाँका अक फिरका दूसरेके लिये मददगार है, मिसलिओ पानीपतका कोभी भी हिन्दू नहीं चाहता कि मुसलमान अपने घर छोड़ें । वहाँके मुसलमान कुशल कारीगर हैं और हिन्दू लोग व्यापारी हैं, जो ज्यादातर अपने मालके लिये मुसलमान पडोसियोंपर निर्भर रहते 1 मगर बहुतसे शरणार्थियोंके मानेसे झुनकी सेक्सी और शान्त जिन्दगीमें गडबडी पैदा हो गभी । मुते हिन्दुओंके रखमें होनेवाला परिवर्तन, जो मेरे पानीपतके दोरेके बाद वहाँके शरणार्थियोंद्वारा मुस्लिम घरोंपर कब्जा करनेके रूपमें दिखाओ देता है, और वहाँके मुसलमानोंकी हिजरतकी बात समझमें नहीं आती । यह सच आखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीके सुख प्रस्तावके शब्दों और अर्थसे सुल्टा है जिसका मैंने जिक किया है। मुझे लगता है कि मै पानीपत जाकर रहूँ और वहाँकी बदली हुआ हालतकी खुद जाँच करूँ । कण्ट्रोल हटनेपर लोगोंसे अपेक्षा मिस्री तरह गाधीजीने कभी तरहके कण्ट्रोलेकि बारेमे थे. आमी सी० सी० में पास किये गये ठहरायकी चर्चा की । सुन्होंने कहा, जब तक देशमें अनाजकी तंगीकी भावना बनी रहेगी, तब तक हिन्दुस्तानके हर अमीर और गरीब नागरिकले यह अपेक्षा रखी आयनी कि वह जरूरत से ज्यादा अनाज काममें न ले । जब कण्ट्रोल हटा दिया जायगा, तब स्वभावसे यह आशा की बायगी कि अनाज पैदा करनेवाले अपनी मरजीसे अनाज जमा करना छोड देंगे और जनताको ठीक दार्मोपर अपने पासका अनाज और दाल देंगे । अवाज बेचनेवालोंसे यह अपेक्षा रखी जायगी कि ने अकसा और सुचित सुनाफा लेकर सस्तेसे सस्ते दामभि अनाज बेचनेका ज्यादा खयाल रखेंगे । और सरकारसे यह झुम्मीद रखी जायगी कि वह अनानके कण्ट्रोलको धीरे धीरे ढीला करेगी और अन्तमें जल्दीसे जल्दी असे हटा देगी । यही बात, लेकिन ज्यादा जोरसे, कपनेके कण्ट्रोलपर भी लागू होती. है । लेकिन मिस बारेमें मुझे जो बात कही गयी है, वह सबसे ज्यादा १८७
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