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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२११

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वैचैन करनेवाली है । यानी, मुझे यह बताया गया है कि ओ० आभी० सी० सी० के मेम्बर, जिन्होंने मिन ठहरायोंके लिये वोट दिये हैं, खुद ही अपने फर्जके प्रति बफादार नहीं है। मुझे आशा है कि यह सूचना बिलकुल बेबुनियाद है । अगर मेरी यह आशा सच हो, तो जिसमें को शक नहीं कि जनताके भितने प्रतिनिधि लोगोंके वरतावने जरूर असा अच्छा फेरफार कर सकेंगे, जिससे १५ अगस्त और सुसके कुछ दिन बाद तक दुनिया में हिन्दुस्तानकी ओ साख और भिज्जत थी, वह फिरले कायम हो जाय । ६९ शर्मनाक दृश्य १९-११-२४७ भाज शामको प्रार्थनासभा में भाषण करते हुये गाधीजीने कहा, चल गानको मैने हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्धोंके बारेमें पास दिये गये अ० आभी० सी० सी० के खास ठहरावका जिक्र किया था। लेकिन लाज ही मुझे मिसाल देकर आपसे यह कहना पडता है कि दिल्ली में शुख ठहरावको कैसे बेकार बनाया जा रहा है। मुझे जिस वावकी कल्पना भी नहीं थी कि जिस गामको मैं जनताके बरतावके बारेमें अपना शक जाहिर कर रहा था, झुसी शामको पुरानी दिल्लीके केन्द्र सुसे सच साबित करके दिखाया जायगा । कल रात मुझसे कहा गया कि चाँदनी चौककी भेक मुसलमानकी दूकानके सामने हिन्दुओं और सिक्खोकी बहुत बड़ी मी मिnal हुआी थी। वह दूकान थी तो मुसलमान की, लेकिन शुका मालिक से छोकर चला गया था । वह जिस शर्तपर येक शरणार्थीको दी गयी थी कि मालिकके छौट मानेपर से दूकान छोड़ देनी होगी । खशीकी बात है कि दुकानका मालिक खौट आया । वह हमेशा के लिये अपना धन्धा नहीं छोड़ना चाहता था। जिस अफसर के हाथमें यह काम या, वह दूकानमें रहनेवाले शरणार्थीके पास गया और १८८