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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२१२

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झुसे असल मालिकके लिये दूकान खाली कर देनेको कहा। पहले तो वह शरणार्थी भाभी कुछ हिचकिचाया, लेकिन वाद लुसने कहा कि आप जब शामको दुकानका कब्जा लेनेके लिये आयेंगे, तो मे जरूर खाली कर दूँगा । अफसर जव गामको दूकानपर लौटा, वो झूले पता चला कि वहाँ रहनेवाले आदमीने दुकानका कब्जा मुसके मालिकको सौंपनेके बजाय अपने माथियों और दोस्तोंको मिस वातकी सूचना कर दी, जो कहा जाता है कि वहाँ धमकी देनेके लिये भिकट्ठे हो गये थे । चाँदनी चौकके थोडेसे पुलिसवाले खुस भीडको काबू न रख सके । मिसकिने सुन्होंने ज्यादा मदद बुलाभी । पुलिस या फौजके सिपाही आये और सुन्होंने हवामें गोली चलाओ । हरी हुम भी बिखर तो गमी लेकिन साथ ही मेक राहगीरको छुरेसे घायल भी करती गरी । तक्वीरसे यह घाव जानलेवा सायित नहीं हुआ। लेकिन फिसारी लोगकि प्रदर्शनका अजीव नतीजा हुआ। वह दुकान खाली नहीं की गक्षी । मै नहीं जानता कि आखिर में झुस अफसर के आदेशको ठुकरा दिया गया या जिस वक्त तक वह दुकान खाली कर दी गयी है। फिर मी, मुझे आशा है कि हिन्दुस्तानको जो बहुमूल्य थाजाबी मिली है सुस अगर सरकारी सत्तांको सच्ची सत्ता बनी रहना है, तो यह अपराधीको अपराधकी सजा दिये बिना न रहेगी, वर्ना सरकारकी सत्ता सत्ता ही न रह जायगी। मुझसे कहा गया है कि हिन्दुओं और सिक्खोंकी वह मी दो हजारसे कम की न रही होगी । यह खबर मिस रूपमें मुझे मिली है मुसे कुछ कम करके ही मैंने सुनाया है । अगर फिर भी सुसमें सुधारकी फोभी गुजाअिध हुआ और वह मेरे ध्यानमें वामी गभी, तो मैं खुशीसे आपको बता दूँगा । सिक्खोंक दोष यही सब कुछ नहीं है। दिल्लीके दूसरे हिस्से में मुसलमानको अपने घरोंसे जबरन निकालने की कोशिश की जा रही है जिससे वहाँ हिन्दू और सिक्ख शरणार्थियों को जगह दी जा सके । जिसका तरीका यह है कि सिक्ख लोग अपनी तलवारें म्यानसे निकालकर घुमाते हैं और मुसलमानोंको अपने घर न छोनेपर भगानक बदला लेने की धमकी १८९