सबसे पहले आवादीकी चमक और उत्साह महसूस करना चाहिये । सुनके वारेने लोगोंको यह कहनेका मौका न मिले कि खूपरसे लादे हुये भवानक संयम और पावन्दियोंमें ही सुनसे अच्छा बरताव कराया जा सकता है । सुन्हें अपने सही बरतावते यह चाचिन कर देना है कि वे भी दूसरोंकी तरह हिन्दुस्तानके योग्य और आदर्श नागारेक बन सकते हैं। अगर ये कानूनके रावक ही कानूनको ठुरायेंगे, वय तो राज चलाना भी असम्भव हो सकता है । और अखिल भारतीय काप्रेम कमेटीके ठहरावोको ठीक तरहसे अनलमें लाना सबसे ज्यादा मुश्किल हो जायगा । शेरवानीकी कुरबानी तसवीरका बुवाला पहल बतानेके बाद अब मे आप लोगों को सरा चमकीला महल भी शीते बताभुंगा । मुझे भादर्श वहादुरीकी अक आखदिखी कहानीका जो वर्णन मिला है, वह मै आपको सुनाता हूँ " नीर मकबूल शेरवानी बारामूला में नेशनल कान्फरेन्सका अक नौजवान बहादुर नेता था । खुलने अभी तीसवें बरलमें प्रवेश ही किया था । "यह जानवर कि वह नेशन कन्फरेन्eer बड़ा नेता है, हमलावरोंने झुले निधात टॉकीजके पास दो खम्भोंसे बाँध दिया । पहले न्होंने से पीटा और दाद न्हा कि वह नेशनल कान्फरेन्स और सुरूके नेता शेरे कारमोर शेख अब्दुल्लाको होड दे । सुन्होंने शेरवानीते कहा कि वह आबाद काश्मीरकी मारजी हुकूमत की, जिसस हेडक्वार्टर पालन्द्रीनें है, वफादारीकी सौगन्द से । " शेरवानीने मजबूतीसे नेशनल कान्फरेन्सको होनेसे जिन्दार र दिया और हमलावरोंने साफ कह दिया कि शेरे काश्मीर अब राजके प्रधान मन्त्री है। हिन्दुस्तानी उघकी फौज कास्मीर में आ पहुँची है और यह थोड़े ही दिनोंमें हमलावरोंगे काश्मीरसे निकाल बाहर करेगी । 名味 यह सुनकर हमलावर गुस्सा हुये और डर गये । और झुन्होंने 1 १४ गोलियोंसे सुसका शरीर छलनी बना डाला । सुन्होंने सुसकी नाक काट ली और झुमके चेहरेको बिगार दिया, और सके शरीरपर भेक मितहार लगा दिया जिसपर लिखा था " यह गद्दार है । मिसका नाम शेरवानी है । सारे गद्दारोंका यही हाल किया जायगा ।" १९२
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