गोशालाओंका भिन्तजाम मिलिजे हिन्दुस्तानभरमे गोशालाओं गवी सस्याओं होनेके बजाय जहाँ कोजी शन हिन्दुस्तान के टोरोको ठीक तरह से पालने की कला सीख नफे, जो आदर्श संअरियाँ हो, और जहाँसे लोग अच्छा दूध, अच्छी गाय और अच्छी नलके नाग और मजबूत बैल सरीद सकें सिर्फ असी जगह है, जहाँ दोरी तरह रसा जाता है । मिस्रका नतीजा यह हुआ है कि हिन्दुस्तान दुनिया सा व्यास वेत्र होनेके बजाय, जहाँ बड़े अच्छे दोर हो और जो मस्तेसे मस्ते दार्मोपर जितना चाहो श्रुतना शुभ दूध मिल सके, आज मिस मामरेमें शायद दुनियाके सारे देशों नीचे है । गोशालावाले जितना भी नहीं जानते कि गोवर और गोमूत्रका 1 नतीजा यह हुआ है कि गवाँ दिये हैं। किसी लिये बोल है और पह अच्छे अच्छा क्या सुपयोग किया जाय, न ये यही जानते कि मरे हुने जानवरका कैसे सुपयोग किया जाय । अपने अज्ञानकी वजहसे सुन्होंने करोड़ो रुपये माहिरने कहा है कि हमारा पशुधन देशके सिर्फ नष्ट कर देनेके ही काल है । में जिनसे सहमत नही हूँ । मगर यदि आन अज्ञान जिसी तरह कुछ दिनों तक और बना रहा, तो मुझे यह जानकर ताज्जुब नहीं होगा कि पशु देशके लिये बोझ बन गये है । जिसलिये मुझे झुम्मीद है कि जिस गोशाला प्रबन्ध करनेवाले भिसे हर दृष्टिकोणले ओक आदर्श संस्था बनानेकी पूरी पूरी कोशिश करेंगे । १९७
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