७२ मोनीपतके ओसाओ २२-११-२७७ गुडगाँवके नजदीक ओक गोत्र श्रीसामियोंके साथ होनेवाले बुरे चरतावका फिरसे जिक्र करते हुये गाधीजीने अपने आज गामके भाषण में कहा कि मुझे खमर मिली है कि कुछ कुछ भैसा ही बरताव सोनीपत के असामियोंके साथ हुआ है। मुझसे कहा गया है कि पहले तो वहाँ असामियोंसे प्रार्थना की गओ कि वे मरणार्थियोंको अपने amateा पयोग करने दें । असामियोंने खुशीसे जिसकी भिजाजत दे दी और अितके लिखे मुन्हें धन्यवाद भी दिया गया। मगर यह धन्यवाद अभिशाप में बदल गया, क्योकि झुनके दूसरे मकान भी जबरदस्ती गरणार्थियोंके काम में ले लिये गये और झुनसे कह दिया गया कि अगर वे सोनीपतमे अपनी जिन्दगीको बहुत ट्रुखी नहीं देखना चाहते, तो हाँसे चले जायें। अगर यह बात असी ही हो, जैसी कि वह कही गभी है, तो साफ जान पडता है कि यह बीमारी यह रही है और क्रोभी नहीं बता सकता कि यह हिन्दुस्तानको कहों के जानेवाली है । जैसे को तैसा ? मुझसे कहा गया बुराजियों कम नहीं सुम्मीद नहीं की जब मे कुछ दोस्तोंसे चर्चा कर रहा था, तब कि जब तक पाकिस्तान में होनेवाली भिसी किस्मकी होती, तब तक हिन्दुस्तानी सपमें ज्यादा सुधारकी जा सकती । जिस बातके समर्थनमें मेरे सामने लाहोरके बारेमे जो कुछ अखवारोंमें छपा है, सुसका खुदाहरण रखा गया । मे खुद असवारोंकी खबरोंको सोलह आने सच नहीं मानता और मखबार पढनेवालोंको भी मे चेतावनी दूंगा कि वे नमें छपी कहानियोका अपने खूपर आसानीसे असर न पहने दें | अच्छेसे मच्छे अखवार भी खबरोंको बढ़ाचढाकर कहने और लुन्हें रँगनेसे वरी नहीं हैं। मगर मान लीजिये कि जो २०३
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