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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२३०

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लम्बे भाषण दिये जा मके । में कभी बिना मतलब के या सिर्फ अपनी आवाज सुननेके लिये नहीं बोलता । - हिंसा ठीक नहीं मेरे पाम सभा शेक भाभीने भेक लिखा हुआ सवाल भेजा है। अन्होंने पूछा है - जिस आदमीका हक खतरे में हो, वह क्या हिंसासे सुते नहीं चचा मक्ता ? मेरा जवाब यह है कि हिंसा} दरअसल न तो किसी आदमीको बचाती है और न उसके इकको । हरभेक हक जय मेज अच्छी तरह भदा किये हुमे फर्जसे निकलता है, तभी सपर कोभी हमला नहीं कर सकता । मिल तरह अपनी मजदूरी या वेतन पानेका हक मुझे तभी मिलेगा, जब से हाथमें लिये हुये कामको पूरा कर दूँगा | अगर मे अपना काम पूरा किये बिना वेतन या मजदूरी देता हूँ, तो वह चोरी होगी। जिन फर्बोपर मेरे इक निर्भर रहते हैं और जिनसे वे निकलते है, सुनको पूरा किये विना मे हमेशा अपने हकोंपर ही जोर नहीं दे सकता । हरिजनोंपर जुल्म g अनारोंमें यह खबर छपी है कि रोहतक और दूसरी जगह के आट हरिजनोंकी आजादीपर हमला करते हैं । यह कोभी नभी बात नहीं है। ब्रिटिश हुकूमत में भी हरिजनोंकी आजादी मे वस्तन्दाजी की जाती श्री । फिर भी, आज नयापन यह है कि हमारी सभी मिली हुआ आजादीने हरिजनोंपर किया जानेवाला जुल्म घटनेके बजाय ज्यादा बक्ष गया है । क्या हिन्दुस्तानका हर आदमी यह आजादी नहीं भोग सकता, फिर इसका समाजी दरजा कैसा भी क्यों न हो 8 क्ल तक हरिजन जैसा गुलाम और दबा हुआ था, वैसा ही क्या वह आज भी रहेगा मेरी राय भेक बुराभी दूसरी बुरामीको जन्म देती है। पाकिस्तान में हमारे हिन्दू और सिक्स भाभियोंके साथ कितना ही बुरा बरताव किया गया हो, लेकिन जब हमने बदलेकी भावनासे यूनियनके हमारे मुसलमान भाभियोंके साथ चुरा बरताव किया, तो खुसने हमारे श्रसाभियोंके सायके वरे वरताको जन्म दिया । हरिजनोंके साथका हमारा चरताव ૨૦૧૬