तरफ हिन्दू और सिक्ख और दूसरी तरफ मुसलमान येक दूसरेके दुश्मन चन गये हैं। जिसका शर्मनाक नतीजा हम देख ही चुके हैं । 1 प्रार्थनामें आनेवालोंके दिल बैरभावसे खाली हों जितना ही काफी नहीं है । झुन्हे दोनों जातियोंग फिरसे मेलजोल कायम करने में सक्रिय भाग लेना चाहिये, जो खिलाफतके दिनोंमें हमारे गर्नकी चीज था । क्या सुन दिनों हिन्दू-मुसलमानोंकी मिलीजुली सभाओं में में शामिल नहीं हुआ था ? म केको देखकर मेरा दिल आनन्दसे छलने लगता था । क्या वे दिन फिर कभी नहीं करेंगे ! सबसे ताजा झगड़ा फ्ल हिन्दुस्तानकी राजधानीमें जो टु सदाभी घटना हुआ, खुसपर जरा विचार कीजिये । कहा जाता है कि कुछ हिन्दू और सिक्स निराश्रितोंने भेक खाली मुस्लिम घरपर कानूनके खिलाफ कब्जा करनेकी कोशिश की । सपरसे झगड़ा हुआ। कुछ लोग घायल हु लेकिन तकदीरखें कोसी मरा नहीं । यह घटना धुरी थी। लेकिन झुसे खूब वाचढाकर बताया गया। पहली खबर यह भी कि मिम झगड़े में चार सिक्ख मारे गये । नतीजा वही हुआ, जो भैसी बातों होता है । बदलेकी भावना भड़की और कभी लोग कुरेसे घायल किये गये । मालूम होता है कि अब भेक नया तरीका काममें लिया जाता है। अब सिक्स लोग किरपाणोंकी जगह तलवारें रखने लगे हैं । बे नगी तलवारें हाथमें लेकर हिन्दुओंके साथ या अकेले मुसलमानोंके घरोंपर जाते हैं और न्हें मकान खाली करनेके लिये धमकाते हैं। अगर यह खबर सच हो, तो यूनियनकी राजधानीमै भैंसी चीज बडी भयानक और शर्मनाक है । अगर सच नहीं है, तो उसकी तरफ और ज्यादा ध्यान देनेकी जरुरत नहीं । अगर वह सच हो, वो खुसकी तरफ सिर्फ सरकारको ही नहीं, बल्कि जनता को भी फौरन ध्यान देना चाहिये। क्योंकि सत्ताघारियोंके पीछे अगर जनता नहीं होगी, तो बे कुछ न कर सकेंगे । मे निश्चित रूपसे यह नहीं जानता कि भैसी हालत में मेरा क्या धर्म है । जितनी बात तो साफ है कि हालत दिनोंदिन ज्यादा बिगड़ २०९
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