रही है। जल्दी ही कार्तिकी पूनन आ रही है। मेरे पास तरह तरहकी अफवाहें आती रहती है । मैं आशा करता हूँ कि हरे और ब मदके समयकी अफवाहों की तरह ये अस्वाहें भी झूठ साबित होंगी। भिन अफवाहोंसे मेक पाठ तो सीखा जा सकता है। आज हमारे पास मान्तिकी भी पूजी अना नहीं है। हमें रोजकी कमाओ रोज करनी है । यह हालत किसी राज या राष्ट्रके लिये अच्छी नहीं कहीं जा सती । राष्ट्रके हर वक्को गहराते यह नोचना है कि सुते राष्ट्रको वा जानेवाले अिन बहरको मिटानेके लिये क्या करना है । किरपाण और उसका अर्थ यहाँपर लायलपुरके सरदार सन्तसिंघने लम्बे उतपर विचार करना अच्छा होगा । वे पहले केन्द्रीय असेम्बलीके सदस्य रह चुके हैं. और सुन्होंने विक्लांग जवरदस्त चचाप किया है । सुन्होंने पिछले बुधवारक मेरे भाषणका जो अर्थ किया है, वह भाषण मेरा मतलब तो असा कभी था ही नहीं । यावद जानते होंगे कि जसे मे १९१५ द लिक्स दोस्तोंके चाय मेरा गहरा सम्बन्ध रहा है। से नहीं निकलता । सरदार साहब यह लौटा हूँ, वहते क्षेत्र जनाना था जय हिन्दुओं और मुचलनानकी तरह तिक्ख भी मेरे बेदवाक्य मानते थे। लेकिन अय समय साथ लोगों को बदल गये हैं । मगर मे जानता हूँ कि मैं खुद तो नहीं बदला हूँ । सखार माहव शाब्द नहीं जानते कि विक्स मान किधर जा रहे हैं। मैं मिक्लोन पक् दोस्त हूँ । मुझे अपना को स्वार्थ नहीं साधना है । जिसमें मैं अच्छी तरह देख सकता हूँ कि वे किधर जा रहे हैं। ने सुनका सच्चा दोस्त हूँ, जिसलिये झुनले खाक सार शब्दोंनें दिल खोलकर बात कर सकता हूँ । मे हिम्मतके साथ यह कह सकता हूँ कि न्सी मोकॉपर चिक्स लोग मेरी सलाह नानकर कठिनाभिचारे पार हुमे हैं। जिस मुझे यह याद दिलाने की जरूरत नहीं कि मुझे तिक्खा या दूसरी जातिके लोगोंके बारेमें सोचसमझकर बोलना चाहिये । सरदार बन्ततिर और दूसरे सारे सिक्व, जो क्लिक भला चाहते हैं और आपके बहावमें वह नहीं गये हैं, भित्र बहादुर और महान जाविते पागलपन, २१०
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