वगैरा काटनेके लिये मेक दूसरेकी अपने आप मदद करें, तो अनाज सस्ता होगा | लेकिन अगर किसानको दाम देकर मजदूर लगाने पचेंगे, सो दाम देगा । पहले तो यह रिवाज था ही । भेक किसान दूसरे किसानोंको निमन्त्रण देता था। फसल काटनेका और साफ करके घरभ ले जानेका काम हाथोंहाथ् खतम हो आता था। आज हम वह रिवाज भूल गये हैं, मगर खुले वापस लाना चाहिये । भेक हाथसे कुछ काम नहीं हो सकता ! किसान - राज फिर वह भाभी यह भी कहते हैं कि मन्त्रियोंमेंसे कमसे कम क तो किसान होना ही चाहिये । हमारे दुर्भाग्यसे आज हमारा भेक भी मन्त्री किसान नहीं है। सरदार जन्मसे तो किसान हैं, खेतीके बारेमे कुछ समझ रखते हैं, मगर सुनका पेशा वैरिस्टरीका था। बवाहरलालजी विद्वान हैं, बडे लेखक हैं, मगर वह खेतीके वारेमें क्या समझें : हमारे देशमें ८० फीसदी से ज्यादा जनता किसान है। सच्चे प्रवातन्त्र हमारे यहाँ राज किसानोंका होना चाहिये । झुन्हे वैरिस्टर बनने की जरूरत नहीं । अच्छे किसान बनना, सुपत्र पढाना, जमीनको कैसे ताजी रखना, यह सब आनना झुनका काम है । असे योग्य किसान होंगे, तो मै जवाहरलालजी से कहूँगा कि आप जिनके मन्त्री बन आये । हमारा किसान मन्त्री महलोंमें नहीं रहेगा। वह तो मिट्टीके घर में रहेगा । दिनभर खेतों में काम करेगा | aii योग्य किसानोंका राम हो सकता है । 1 1
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