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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२४८

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1 1 हाथसे हैं । हें निश्चय करना चाहिये कि आजाद हिन्दुस्तानमें तो वे शुद्ध कौसी ही कमायेगे । व्यापारमे जितनी साँग है, झुसे दूर करेंगे। भानो कि चीनी दाम कदम बढ जाता है। तो सुसका अर्थ यह होगा कि कल तक जो व्यापारी १०% नफा लेता था, वह आन ५०% देने लगा है । मेरी समझमे तो ५% से ज्यादा नफा छैना ही नहीं चाहिये । कण्ट्रोल लुठनेसे चीनीके दाम बढनेका कर सिद्ध न हो, तो दूसरे अकुण अपने आप निकल जायेगे । गन्ना किसान योता है । खुसे तो पूरा नाम मिलना ही चाहिये । मिस कारणसे चीनीके दास बहुत ज्यादा नहीं वह सकते। व्यापारी अपना हिसाब साफ रखे। वह साफ बता है कि जितना किसानको जेवमे गया । खुस्की जेवम ५% से अधिक नहीं गया। चीनी कारखानाके मालिकोंके बाद छोटे व्यापारी रहते हैं । ये अगर बेहद वारा हूँ, तो भी जनता भर जाती है । तो झुन्हें भी सीधा माना है । atest arrive ere लगाया जाय अक भाभी तीसरे वरनेका किरामा बढाने की शिकायत करते हैं । वह लिखते हैं कि अगर हुकूमतको ज्यादा पैसेकी जरूरत हो, तो जैसी बीजोंपर टैक्स बढ़ाना चाहिये जिनकी जीवन निर्वाहके सिओ भरुरत नहीं, जैसे कि तम्बाकू वगैरा। आज हमारे हाथमें क्लोडों रुपये आ गये हैं। भिसलिये इस करोड़ों खर्च कर डालें, यह ठीक नहीं। हमे भेक प्रेक कोठी फूंक-फूंककर सर्च करनी चाहिये और देखना चाहिये कि यह पैसा हिन्दुस्तानको पीये बाता है या नहीं ? सच्चे पंचायत-राम में हम लोगोसे जा लेते हैं, सुससे १० गुना सुन्हें वापस मिलना चाहिये । देहातोकी सफामी, सेहत, सड़कें बनाना वगैरापर पैसा खर्च होना है । देहाती अय समझ लेंगे कि सुनका पैसा सुन्होंपर खर्च हो रहा है, वो वे खुशीसे टैक्स देंगे। होमगार्ड मिलिटरीपर भी कमसे कम खर्च करना पड़ेगा । कलसे मिलिटरी पैसे लेनेवाली नहीं, लोगों की अपनी बनेगी । जो मिलिटरी अपने आप २२५