जिससे मुल्टी स्थितिका विचार कीजिये । काठियावाडकी ही सिसाल लीजिये। अगर पाकिस्तानके बड़े बड़े अखबारोंमें लिखे मिलजामों की तरफ मैं ध्यान न देता – खासकर जब पाकिस्तानके प्रधान मंत्री ने भी - कहा कि मिल्जाम मूलमें सही हैं - तो मुसलमान तो सुन मिलनामोंको वेदवाक्य ही माननेवाले थे। मगर अब भने मुसलमानोंक मनमें झुनकी सचाभीके बारेमें शक है । सच्चे बनिये घरमें तो किसी तरह की गड़बर होने चाहे वह कवी टीका ही क्यों न मैं चाहता हूँ कि जिस घटना परसे काठियावाडके और दूसरे मित्र यह पाठ सीखें कि हम अपने नहीं देंगे। टीकाका स्वागत करेंगे हो । अविक सच्चे बनेंगे और नव कमी भूल देखने में आयेगी, सुसे सुधारेंगे । हम यह सोचनेकी गलती न करें कि हम कमी भूल कर ही नहीं सकते । कक्वीसे कवी टीका करनेवालेके पास हमारे खिलाफ कोअ न कोभी सच्ची या काल्पनिक शिकायत रहती है । अगर हम के साथ धीरज रखें, जब कभी मौका बावे सुसकी भूल असे बतायें, और हमारी गलती हो तो झुसे सुधारें, तो हम टीका करनेवालेको भी सुधार सकते हैं । जैसा करनेसे हम कभी गस्ता नहीं भूलेंगे। जिसमें शक नहीं कि समता तो रखनी ही होगी । समझदारी और शनाख्तकी हमेशा जरूरत रहती है । जानबूझकर शरारतकी ही खातिर जो बयान दिये जाते हैं, झुनकी तरफ ध्यान नहीं देना चाहिये । मै मानता हूँ कि लम्बे अभ्याससे मे शनाख्त (विवेक) करना योमा-बहुत सीखा गया है । I भाऊ हवा विगडी हुभी है। अक दूसरेपर मिल्जाम ही जिलनाम लगाये जाते हैं । भैसी हालतमें यह सोचना कि हम गलती कर ही नही सक्ते, मूर्खता होगी 1 हम जैसा दावा कर सकें, यह खुशकिस्मती आन कहाँ 2 अगर मेहनत करके हम झगडेको फैलने से रोक सकें, और फिर झुसे जसमूलसे सुखाड़ फेंकें, तो बहुत है । अगर हम अपने दोष देखने और सुननेके लिये अपनी आँखें और कान खुले रखें, तभी हम मा २३१
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