रहनेके लिये तम्बू वगैरा कुछ भी मिल जायें और खाने-कपदेकी व्यवस्था हो जाय, तो काफी है। आज चौथी चीज कहीं भी मिल नहीं सकती। } यह सब मैने आपको मिनलिने सुनाया कि आप यह जाने कि हिन्दमे आज कैसे कैसे बेभीमानीके खेल चल रहे हैं । आज यहाँ हमारी हुकूमत है या नहीं ? अगर हमारी हुकूमत है, तो वह जो कहे, मोहम करना चाहिये । जवाहरलालजीने किसी भाषण में कहा है- मुझे प्राभिन मिनिस्टर क्यों कहते हैं ? मुझे तो पहले नम्रका सेवक कहिये | अगर हिन्दुस्तानके सच हाफिम जैसे सेवक वन जायें, तो सुखका नक्शा ही पलट जाय । तब मौज-गोकका सवाल ही नहीं रहता । सारे सेवक हर समय लोगोंका ही खयाल करेंगे। तभी हमारे देशमें रामराज्य कायम हो सकता है और पूरी आजादी भा सकती है। आजकी भातारी तो मुझे चुभती है । ८३ बाकी अहमियत ३-१२-४७ आज मेरे पास कुछ भामी भा गये थे। वैसे तो भी लोग आते रहते हैं, मगर कुछ खास कहनेका रहता है, तब आपसे सुमा जिक करता हूँ । भिन भाभियोंने कहा कि हमारे प्रधानाने फ वक्त जो कहा था, सुसका वे आज भग कर रहे हैं। मैं नहीं जानता किं सुन्होंने असा क्या किया ? मेने खुनसे कहा कि आपको जो बताना है, तो मुझे बत्ताभिये । मै हुकूमत नहीं हूँ, मगर जिन लोगोंके हाथमें हुकूमत है, सुनते कह सकता हूँ । उसे मिलशासकी अब सावधानीले जाँच की जाती है, तो वे अक्सर गैरसमझसे पैदा सुभे सावित होते हैं। लोगोंको भैसा क्यों लगता है कि मंत्रियोंने कही येक बात थी और वे करते दूसरी बात हैं 2 सुझपर भी यह बीती है । मैंने जानबूझकर कभी किसीको धोना नहीं दिया । मगर २३६
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