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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२६४

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बुलाया और नसे कहा कि आप हमारे भाभी हैं । भापसे हमारा कोजी जगदा नहीं है । मुझे यह जानकर खुशी हुआ । होशंगाबाद वही जगह है, जहाँ स्टेशनपर मेक घटना हो गमी थी । होशंगाबादमें गुरु नानकके जन्मदिनपर सिक्सोने जैसा किया, वैसा सब जगह लोग करें, तो आज हमपर जो काला धब्बा लग गया है, मुसे हम धो सकेंगे। साम्प्रदायिक व्यापारी मण्डल व्यापारी मण्डलवाली बात आगे चल रही है । मैंने भिशारा तो किया था कि मारवाड़ी और यूरोपियन व्यापारी मण्डल रहें, तो मुसलमान चैम्बर क्यों न रहे? क्षेत्र मारवाड़ी भाभीने मुझे लिखा है, कि हम हैं तो मारवाड़ी, मगर हमारे चेम्बरमै दूसरे मी आ सकते हूँ। मैंने सुनसे पूछा है कि आपके चेम्बरमै गैरमारवाड़ी कितने है और हिन्दू कितने हैं ? सुनका खत अप्रेजी में है । मुझे यह झुरा लगता है । सुनको रिपोर्ट भी अप्रेजीमें है । क्या मे अग्रेजी ज्यादा जानता हूँ ! मेरा दावा है कि जितनी मे अपनी जबान जानता हूँ, इतभी अंग्रेजी कभी नहीं जान सकता । माँका दूध पीनेके समय जो जवान सीखी, सुमसे ज्यादा अंग्रेजी जिसे १२ बरसकी झुमरसे सीखना शुरू किया- मुझे कैसे भा सकती है ? भेक हिन्दुस्तानीके नाते जय कोभी मेरे बारेमें यह सोचता है कि मे अपनी जवानसे अभी ज्यादा, जानता है, तो मुझे शरम मालूम होती है। हम अपने आपको धोखा न दें, तो यूरोपियन चेम्बरवाले मी जैसा गवा कर सकते हैं कि हमारे चेम्बर में सब लोग आ सकते हैं। मगर जिससे काम नहीं चलता। अगर सब को आ सकते हैं, तो अलग अलग घेम्बर रखनेकी जरूरत क्या ! यूरोपियनोंसे मेरा कहना है कि वे हिन्दुस्तानी बनकर रहें। अगर वे हिन्दुस्तानी घनकर रहें और हिन्दुस्तान के भले के लिये काम करें, तो हम सुनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं । वे बड़े होशियार व्यापारी हैं । सुन्होंने अपना सारा व्यापार वन्तुकके जोरसे नहीं, बल्कि बुद्धिकी शक्ति वढाया है । २४१