धा, झुसमें अतिशयोक्ति थी और पाकिस्तानके असवारोंमें जो छपा था, वह गलत था । यहाँ सब मुसलमान दहशतमें रहते हैं, यह धात भी गलत थी । मुसलमानोंने माना या कि पाकिस्तान बननेके बाद जो ननने आषेगा, करेंगे । मगर वह हो सकता है, तो सिर्फ पाकिस्तानने ही । हिन्दुस्तानके मुसलमान तो अक तरहसे गिरे पड़े है। गिरे हुमेको लाल क्या मारना ? हिन्दुस्तानमें मुसलमान समुद्रमें बड़े बूंदके समान हैं । जिसी तरह पाकिस्तान में घोटेसे हिन्दू और सिक्स है। तुम्हें वहां भगा दिया गया। वे हट गये, हालों कि हटना नहीं चाहते थे। आज भी सुन सिक्योंका खत था कि हम तो वहीं जाना चाहते हैं। लावलपुरकी नहरके किनारे हजारों अकड़ जमीनका बगीचा में होटकर आभू, तो मेरे मनमें भी होगा कि अपनी जमीनका क्या है । सो हिन्दुओं और सिक्खोंको गुस्सा आया कि हम तो बेहाल पडे है और यहाँ मुसलमान खुशहाल है । न्होंने मुसलमानोंको मारना और भगाना शुरू किया। मुंगेर पुराभीकी नक्ल करना हैवानियत है । मैं फिर मुसलमान भाभियों कहूँगा कि वे अपनी तकलीफको दुगुना, डेडगुना करके न बतावें । दुनियामें डिंडोरा पीटने से क्या फायदा ? दुनिया क्या करनेवाली है ? वह काठियावादके मुसलमानोंको बचा नहीं सकती । बहुत करे, तो आखिर में समा जिस डोमिनियनने दोष किया है, सुसकी आजादी छीन ले । मगर जो मर गये हैं, वे वापस आनेवाले नहीं हैं। हम हमेशा बुरानीको घटानें और भाभीको बढाने, तभी काम कर सकते हैं । 2 ६ 1 ६ से १३ तारीख तक में मुलाकात देना नहीं चाहता है। जिससे कोभी यह न समझे कि मैं बीमार हूँ, या मुझे शौक्के लिये समय चाहिये । मिस हफ्ते में तालीमी सघ, कस्तूरबा ट्रस्ट, चरखा-तंत्र, और प्रामोद्योग संघकी सभा है । मैं सो सेवाग्राम बा नहीं सकता, तो समा यहाँ होगी । इन्हें वक्त तो देना ही चाहिये । यहाँका काम भी करना ही है । मगर बहुतसे लोग मुझे देखनेके लिये माते हैं। मैं जानवर जैसा बन गया हूँ । स्रो जितने दिनोंके लिये यह बन्द करना चाहता हूँ ।
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