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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२८१

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चरसा और साम्प्रदायिक मेल जबसे मे हिन्दुस्तान में आया हूँ, तबसे यही बान कर रहा हूँ। नगर में हर गाँवमें चरसेका गुंजन नहीं पैदा कर नका । अगर वह हो जाता, तो कौमी झगड़ा हो ही नहीं माना था। आज तो सब तरफ यही नाभी देता है कि मुसलमानों को यूनियनचे निकाल दो। बहुतले सुसलमान दिल्ली छोड़कर चले गये हैं। जो थोडे रह गये हैं, सुन्हें भगाने की बात की जा रही है। क्या दिल्लीको हिन्दून कर देंगे मुसलमानोंके चले जानेके बाद क्या सम्जिदोंन हिन्दु जाकर रहेंगे में मानता हूं कि हम ने पागल नहीं बनेंगे। अगर धने, तो हिन्दुमा नाश हो जायगा | जियो और जीने दो अजमेर में मुसलमानोंकी ये वही दरगाह है। वहाँ हिन्दू मुसलमान दोनों नजर चढाया करते थे । हिन्दू-मुसलमानों कोभी लगदा न था । कभी होता भी था, तो जल्दी मिट जाता था । सुनता हूँ कि वहाँपर खासा झगड़ा चल रहा है। काफी मुसलमानों को तरावर भगा दिया गया है। जो रह गये, सुनमेसे कभी मार डाले गये । आसपास के देहात में भी झगडेका जहर फैल रहा है। अगर यह सही है, तो बहुत हुरी बात है । अश्वर हमें सन्मति दे कि हम हिन्दू धर्मके नाश करनेवाले न बनें ! जिस दुनिया में अगर हमें जिन्दा रहना है, तो हमें सबको जिन्दा रखना होगा । सब मुसलमानोंको भगा देने, मार डालने वा गुलाम बना रतनेका मतलब हिन्दू धर्मको बरबाद करना है। किसी तरह पाकिस्तानम सब हिन्दुओं और विक्खाको मगा देना, मार डालना या गुलाम बनाकर रखना मिस्लामका नाग करना है। कहते हैं कि " विनाशकाले विपरीत- बुद्धिः " । औश्वर इन सबकी बुद्धिको विपरीत होनेसे बचाये ! 2