सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/२८६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

कलकत्तेका हुल्लड़ 2 कलकत्तेके हुल्लडकी खबर आपने अखवारोंमें पढ़ी होगी । आज हवा भैंसी बन भी है कि लोग मानने लगे हैं कि हुल्लव मचा- कर सव कुछ हासिल किया जा सकता है । मत्रेज सरकारसे हमने ३० साल तक लाभी लड़ी। मगर वह हुल्लडबाजीकी उढाभी नहीं थी, ठंढी ताकतकी कमी थी । हमारी समझमें किसीने गलती भी की हो, तो खुसके सामने जबरदस्ती क्या करना था । अखवारोंमें आया है कि हुल्लड करनेवालोंमें विद्यार्थी लोग भी थे। सुनका तो यह तरीका नहीं हो सकता । किसीको असेम्बलीमें जानेसे रोकना ठीक नहीं । असेम्बलीमें मेम्बर को कानून लाते हैं वह अगर हमें पसन्द न हो, तो हमें झुसका विरोध वाकानून करना चाहिये । हुल्लवसे हम हुकूमत नहीं चला सकते । अग्रेजोंके जमानेनें जब हमारे लोग हुल्लड करते थे, तो मुसके सामने मैं झुपवास करता था । आज तो हमारी ही हुकूमत है । सके रास्तेमें रोड़े अटकाना ठीक नहीं । अगर वह टीअर गैस छोडती है, तो हम शिकायत करते हैं। वह लाठी चलाती है, तो 'शिकायत होती है । आजादीका अर्थ यह नहीं है कि इस तूफान करें, तो भी सजा नहीं हो सकती । बाकानून जो हो सकता है, किया जाय । आप अखवारोंभ लिखिये, लोकमत तैयार कीजिये । यह तरीका निकम्मा है, असा कोमी सिद्ध नहीं कर सकता। आपने अभी जिसे अजमाया ही कहाँ है ? हमारी आबादी अभी तीन महीने की तो बच्ची है। मै आपसे नम्रतासे कहता हूँ कि अगर पढे-लिखे लोग सी बातें करने लगे, तो हिन्दुस्तानका कारवार रुक जायगा । लोगोंको खुराक देना, कपडा पहुँचाना, दूसरी सहूलियतें देना, वगैरा कुछ भी काम नहीं हो सकेगा । क्या हम हिन्दुस्तानी सिर्फ मिटाना ही तीखे हैं, बनाना नहीं * औश्वरकी कृपा है कि सबने हुल्लडमें हिस्सा नहीं लिया। अगर सब लेते, तो मी ओ वहशियाना चीज है, यह अच्छी नहीं यन जासी । लोग समझ ले कि हुकूमत हमारी हैं। सुससे कुछ मदद न मिले, वो भी उन्हें हुल्लड़ नहीं करना चाहिये । ૧૩