१४ अक दोस्ताना काम १४-१२-१७ मुझे भेक खत मिला है। शुसमें भेक मामी लिखते हैं कि 'भेक मुसलमान भाभीको मजबूर होकर पाकिस्तान जाना पका है । वह अपनी मेहनत की कमाओका कुछ सोना-चाँदी मेरे पास छोट गये हैं । क्या आप बता सकते हैं कि यह सोना-चांदी असली मालिकके पास कैसे मेजा जाय ?' अगर वह भाभी लिख भेजें, तो मे हुकूमतसे करूंगा कि वह मालिकके पास सकी मिल्कियत मेजनेका भिन्तनाम करदे । मैने मिसका जिक जिसलिये किया है कि हम मान लें कि हममें अब भी असे शरीफ आदमी पड़े हैं। जिस भाजीके दिलमें खयाल भी नहीं आया कि चलो दोस्त तो गया, खुसका माल हडप कर बायें। मुझे अमानसको लौटानेकी फिकर है । अगर हम सब भले बन जायें, तो सब अच्छा ही होनेवाला है । । तभी तालीम मेने आपसे वादा किया था कि हरिजन-निवासमे जब में जाता था, तब वहाँ ओ चर्चा होती थी, सुसके बारेमे आपको थोडासा यता दूँगा । आन मे आपको नभी तालीमके बारेमे कुछ कहना चाहता हूँ । नभी तालीमको शुरू हुये आठ बाळ हुमे हैं। जिस सस्थाका अद्देश्य राष्ट्रको नये आधारपर शिक्षा देना है । मुसके लिये यह कोभी लम्बा समय नहीं है । बुनियादी तालीमका आम तौरपर यह अर्थ किया जाता है कि दस्तकारीके जरिये शिक्षा देना । मगर यह कुछ अश तक ही ठीक है । नभी तालीमकी जब जिससे गहरी जाती है । खुसका आधार है, सत्य और महिंसा । व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक जीवन, दोनोंमें ये ही झुके आधार हैं । विद्या वह, जो मुक्ति दिलानेवाली हो - 'सा विद्या या विमुक्तये ।' ल और हिंसा तो बन्धनकारक हैं । सुनका शिक्षानें | २६७
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