कोभी स्थान नहीं हो सकता । कोजी धर्म यह नहीं विखाता कि estat अत्य और दिलकी शिक्षा दो । सच्ची शिक्षा हरमेक्को सुलभ होनी चाहिये । वह चन्द लाल शहरियोंके लिये ही नहीं, मगर करोड़ों देवातियोंके लिये सुपयोगी होनी चाहिये । जैसी शिक्षा फोरी पोथियोंके घोड़े मेल सकती है। सत्त फिरकेवाराना नजहवते मी कोली ताल्लुक नहीं हो सकता । वह तो धर्म सुन किनव्यापी विद्वान्तोंकी शिक्षा देवी है, जिनमें से सब नम्प्रदायकि धर्म निकले हैं । यह शिक्षा तो attra किताब से मिलती है । खुसके लिये कुछ खर्च नहीं करना पप्ता और सुखे तापनके जोरसे कोमी छीन नहीं तन्ना | आप पूछ सकते हैं कि धुनिनावी तालीमका काम करनेवाले भाभी क्या सत्य और अहिंतानय बन चुके हैं ? मे निवेदन करूंगा कि मे जैसा नहीं कह सकता। मैं यह घोड़े ही बता सकता हूँ कि किसके दिलमें क्या है। हिन्दुस्तानी ताकीनो उनके अध्यक्ष डॉ. जाकिर हुसैन है । श्री आर्यनायकम् और भगादेवी सनी है । न्होंने यह कमी नहीं कहा कि वे सत्य और अहिंसाने । अगर सुना सत्य और महिलानें विश्वास न हो, तो झुनका तालीमी रखे हट जाना ही नुनासिव होगा । नमी तालीनके शिक्षक सत्य और अहिंसाको पूरी तरह माननेवाले हों, तभी सफलना पा लगे । तव ने कठोर से कठोर व्यक्तियोंको चुम् मानिन्द खींच सकेंगे। सुनने के सब गुण होने चाहियें, जो स्थितप्रज्ञके बताये गये हैं, और जो आप रोज प्रार्थनाके संस्कृत लोकोंमें सुनते हैं । तालीनी संघको कामेवने जन्म दिया, नगर अमी वह site जैसा ही बना है ? कामेसमेंसे में निकल गया, सरदार भी निकल जायें, जवाहरलाल माँ चले जायें, जितने वहाँ आज कान करते हैं, वे सब मर जाये, तो भी काम घोड़े ही भरनेवाली है। वह तो जिन्दा हो रहनेवाली हैं। मगर तालीनी सबके बारेमें आज मैला नहीं कह सकते । सुते जैसा बनना है । हर सस्थाको भैसा बनना चाहिये कि व्यक्ति निक्ल जायें, तो भी शुक् कान चन्द्र न हो, बल्कि बराचर घटता और फैलता जाय । विश्वास नहीं रखते २६८
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