आपस में लड़ेंगे। जिसी तरह हमारे यहाँ सब मुसलमान निकाले जायें, तो वह भी बुरा है । हमने तो कमी कहा ही नहीं कि हिन्दुस्तान सिर्फ हिन्दुओं का ही है । आवाज झुठी थी कि मुसलमानोंके लिये अलग जगह चाहिये । मगर जैसा किसीने नहीं कहा कि वहाँ मुसलमानोंके सिवा कोभी रह नहीं सकेगा । १५ अगस्त आभी । आवाज झुठी कि पाकिस्तानम सबको रखना है । मुझे वह अच्छा लगा । पर सपर अमल न हो सका । दोनों तरफ खून-खच्चर वगैरा चलता रहे, तो आखिर में दोनोंका सहार ही होना है। लौटने की शर्तें अक दूसरे भाभी लिखते हैं कि "मुझे लाहोरसे भागना पडा, मगर जब आपने कहा कि सबको अपने घर लौटना ही है, तब मे वापस पश्चिम पंजाव में गया । वहॉपर मेरी जमीन और मकान सरोको मिल चुके थे। मैने बहुत कोशिश की, मगर मुझे वे वापस मिल नहीं सके । मैसी हालत में लोग कैसे वापस जा सकते हैं ? " मैने तो आज किसीको कहा ही नहीं कि वापस जाना है । मुसलमान भाभी सुनके साथ जायेंगे, और जाऊँगा । आज तो सब बात ही बात है। जय मौका आयेगा, तब जरुरत होगी, तो मे भी मगर हमेशा मैसा रहनेवाला नहीं । कहना ओक और करना दूसरा, ग्रह कब तक चल सकता है । आज तो शरणार्थियोंको तैयारी ही रखना है। जब तक मे यह न कहूँ कि फलानी तारीखको जाना है, तब तक से रवाना नहीं होंगे। मेरे मनमें नहीं था कि जितनी बल्वी वापस जानेकी बात भी निकल सकती है । निकली सो अच्छा लगता है । मगर फिजा बदलनेमें कुछ समय तो लगेगा ही । अमी तो तजवीज ही चल रही है । मेरी सुम्मीद है कि जय सब तैयारी हो जावेगी, तब पाकिस्तानवाले गाये मेजकर कह देंगे कि जितने हजार मादमी आवें । पूर्व अफ्रीका हिन्दुस्तानी अव पूर्व अफ्रीकाकी बात करूँगा । वहाँ नैरोवीं नामका भेक शहर है । झुसे बनानेमें सिक्खोंने बडा दिस्या लिया है । सिक्ख जैसे-तैसे G
पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३००
दिखावट