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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३०१

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लोग नहीं, वही कामिल फोम हैं। मेहनत मेहनत करके शुन्दनि रेलें पनाओं, मगर नेपा है । यहाँ ब यहाँ जा नहीं सकते । गिते हैं डाल मजदूरी कर सकते हैं, अगर वहाँ रह नही सक्ते । भिम याने वहीं कानून भी यना है। अभी वह पास नहीं हुआ । सुरा कानूनमें हिन्दुस्तानियोंके हरु बहुत स्म कर दिये है। पटित मादराजी तो फॉरेन मिनिस्टर और प्राजिन मिनिस्टर है। सुनको यहाँफे हिन्दुस्तानियोने तार दिया है और गुम तारकी नवल मुले भेजी है। कि हिन्दुस्तानके आवाद होनेके बाद भी हिन्दुस्तानियां सकते हैं ? मोम्बासा ब्रिटिश लोगोकी हुकूमत है । यहाँ हिन्दुस्तानियोंश यह हाल क्यों ? पूर्व अकामें हमारे काफी ताजिए ( व्यापारी ) परे 'हैं । दिन्दू और मुसलमान दोनों हर जगहसे वहाँ गये है। सुन लोगोंने पैसा भी काफी कमाया है । लेकिन हम्की लोगोंके साथ तिजारत करके कमाया है, पर नहीं । अप्रेस और यूरोपके दूसरे लोगों पहले हमारे लोग वहाँ गये थे। सुहाने वहाँ घड़े बड़े मकान योधे, तिजारत यनाभी । वे सबके साथ मिल-जुला रहे । 1 ही कमामी, जैसा नहीं अपरदस्ती भी नहीं की। न्होंने हमेशा शुरू की कहा जा मकता । मगर न्होंने किसीपर दिनते हैं कि यह बिल रुना चाहिये । मैं भी मानता हूँ कि वह रुक्ना चाहिये। मगर मुझे रोक्नेकी मान हमारी ताक्त नहीं । आपस में दुदमनी करके हम मान अपनी किको क्षीण कर रहे हैं । हमारे पात ओक हो वल है । वह है - हमारा नैतिक बल । झुले खोकर हम कहाँ जायेंगे ? रामसी चलके सामने देवी वह हो टिक सकता है। मै आशा रजता हूँ कि पूर्व अफ्रोफाकी सरकार समझ जायेगी कि शुसे हिन्दुस्तानको दुदमन नहीं बनाना चाहिये । जवाहरलालजीसे तो जो हो सकेगा, वह सब करेंगे ही। ] १७८