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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३१४

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लोग काम कर रहे हैं, वे अपनी जानपर खेल रहे हैं । वहाँ सुनके रहनेसे हिन्दुओं को बड़ा सहारा मिलता है, और मुसलमान भी समझ गये हैं कि ये भले लोग हैं और मेल करानेके लिये आये हैं। ओक जगह मन्दिरको वा दिया गया था। यह तो लगवेकी थात हुआ। इसके बाद कहना कि हिन्दू यहाँ रहें, निक्रम्म्मी बात है । मुसलमान भिसे समझ गये और मन्दिर फिरसे बनाना तय हुआ । कौन बनावे, यह सवाल झुठा । प्यारेलालजीने मुसलमानोंको बताया - गुनाह आपने किया है, कम्फारा ( प्रावस्थित) भी आपको करना है । सुन्होंने कबूल किया । मन्दिर सुन लोगोंने यनाया और कहा आप जिसमें आरामसे पूजा कर सकते हैं। मन्दिरमे देवकी प्राण-प्रतिष्ठा भी हो गभी। अमलदारोंने भित काममे बना हिस्सा लिया । अगर सब जगह भैसा हो, तो सारे हिन्दुस्तानकी शक्ल बदल जाये । रास्ता अक ही है । हम सब अपने धर्मपर कायम रहे - अपने धर्म का पालन करें । P } १०३ क्या वह अहिंसा थी ? २४-१२-१४० मेरे पास हमेशा मिक्स भाभी भाते रहते है । में अखवारोंसे थोड़ा पत्र देता हूँ । मिलने आनेवाले लोग मी मुझे सुनाते रहते हैं । वे लोग बहते हैं कि में तो सिक्खोंका कुमन बन गया हूँ । इन्होने जिसकी परवाह न की होती, अगर मेरी बात हिन्दुस्तान के बाहर कुछ-न- कुछ वजन न रखती 1 दुनिया मानती है कि हिन्दने अहिंसाके, शान्तिके जरिये आजादी ली है। अगर भैसा ही होता, तो मुझे बहुत अच्छा लगता । मगर पंशु और नामदोंसे अहिंसा चल नहीं सकती । यह पंगुपन और गूंगापन शारीरिक नहीं । शरीरसे पशु वननेवाले तो अश्वरकी मदद से अहिंसापर सबे रह सकते हैं । अक बच्चा भी अहिंसापर स्ववा रह सकता है - जैसे प्रह्लाद | जैसा हुआ या नहीं, मे नहीं जानता । पर २९३