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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३१६

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1 धर्म बदल ढालें । 'धर्म-पलटा' शब्द मेरी डिक्शनरीमें ही नहीं है । मैं चाहता हूँ कि हर असामी अच्छा असामी घने । हर हिन्दू अच्छा हिन्दू वने । वह हिन्दू धर्मकी मर्यादा और संयमका पालन करे और झुसमें जो तपश्चर्या वताभी गभी है, मुझे अपने सामने रखकर जीवन व्यतीत करे । लुसी तरह मे चाहता हूँ कि भेक मुसलमान अच्छा मुसलमान बने और सिक्ख अच्छा सिक्ख बने । पाजी हिन्दू अगर मुसलमान बने, तो वह अच्छा मुसलमान हो नहीं सकता । अगर मै अच्छा हिन्दू घनता हूँ और असामीको अच्छा भीसामी बननेकी प्रेरणा देता हूँ, तो में अपने धर्मका प्रचार करता हूँ । भीसाभी लोग जीससके धर्मपर कायम रहें । दुनियामै धर्मकी बुद्धि हो । मैंने अवारों देखा है कि चूँकि अय भसाभी धर्म या दूसरे किसी धर्मको राजसे पैसेकी मदद नहीं मिलनेवाली है, बाहरसे भी बहुत पैसे नहीं आनेवाले हैं, सिठिये हिन्दुस्तानके ७५फी सदी गिरजे बन्द हो जायेंगे । हमारे यहाँके ज्यादातर औसाओ गरीब हैं । लुनके पास पैसे नहीं हैं। मगर पैसेसे धर्म नहीं चलता । असामियोंको खुश होना चाहिये कि पैसेकी यह बला सुनसे दूर हुआ । हजरत सुमरके घर मेक बार बहुतसा मिनाम -भिकराम था गया । वह बहुत गंभीर होकर अपनी वीवीसे कहने लगे कि यह वसा आ गमी है। पता नहीं, अब मै अपने धर्मपर कायम रह सकूँगा या नहीं । भगवान तो हमारे पास पा है । सुसे हम पहचानें । सबसे या गिरजाघर है सूपर आकाश और भीचे वस्तीमाता । खुलेमें क्या मे भगवानका नाम नहीं ले सकता 2 भगवानकी पूजाके लिये न सोना चाहिये, न चादी | अपने धर्मका पालन हम खुद ही कर सकते हैं, और खुद ही मुसका हनन कर सकते हैं । २९५