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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३१८

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1 संयम होता है। यहाँ तो कुछ भी नहीं है। जो कुछ चल रहा है, वह होना नहीं चाहिये। क्या वह यह चाहते हैं कि हिन्दू सिक्ख और मुसलमान हमेशा अलग ही रहें ? मुसलमान अगर हिन्दुओं और सिक्खोंको मार-काटे, फिर भी हमारा धर्म क्या है ? वह मे आपको रोज चतलाता हूँ । हिन्दू और सिक्ख कमी बदला न लें। सीधी बात यह है कि काश्मीरपर पाकिस्तानकी ही चढाओी है। हिन्दुस्तानका लड़कर वहाँ गया हुआ है, मगर चढाओ करनेको नहीं । वह महाराजा और शेख अब्दुल्लाके बुलानेपर वहाँ गया है । काश्मीरके सच्चे महाराजा शेख अब्दुल्ला है । हजारों मुसलमान झुनपर फिदा हैं। जम्मूकी घटना अपना गुनाह हरभेकको कबूल कर लेना चाहिये। जम्मूके सिक्खों और हिन्दुर्भाने या बाहरसे आये हुये हिन्दुओं और सिक्खोंने वहाँ मुसलमानोंको काटा । काश्मीरके महाराजा मिंग्लैण्डके राजाकी तरह नहीं हैं। सुनकी रियासत में जो भी बुरा-भला होता है, शुसकी जिम्मेदारी सुनके सिरपर है। वहीं काफी मुसलमान कतल किये गये। काफी लडकियों सुबाभी गभी। जेल अब्दुल्ला साहबने बचाने की कोशिश की। जम्मूसे जाकर सुन्होंने यहस की, लोगोंको समझाया। काश्मीरके महाराजाने अगर गुनाह किया है, तो तुन्हें या जिस किसीने गुनाह किया है, से हटानेकी बात मैं समझता हूँ। पर काश्मीरके मुसलमानोंने क्या गुनाह किया है कि शुनपर हमला होता है 2 पाकिस्तानको अभिमान पाकिस्तानकी हुकूमत मे अदवसे कहना चाहता हूँ कि आप कहते हैं कि भिल्लामकी सबसे बडी ताक्त पाकिस्तान है । मगर आपका झुसका फक्ष तभी हो सकता है, जब आपके यहाँ भेक-भेक हिन्दू-सिक्सको बिन्साफ मिलें । पाकिस्तान और हिन्दुस्तानको आपसमे बैठकर फैसला करना चाहिये, लेकिन तीसरी ताकतके मारफत नहीं । दोनों तरफके प्रधान बैठकर बातें करें । महाराजा अपने आप समझकर अलग बैठ जायें और लोगों को फैसला करने दें। शेख अब्दुल्ला तो ।