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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३२९

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लायक समझते हैं, तो मुझे यह ट है और कामीरके मुसलमान हिन्दू राज जुन्नरे नीचे और वे सुनकी रक्षा लेते आये है । शेत अन्टु साह हो साहबके लिये यह जाने area सन नया है । ऊपर भाग मुन्हें नि न्हें हर तारादन लिन्ना चाहिये । लोगों मामने नही | fs अ न त के, तो सिर्फ इ नहीं जा सन्ता । महाराजा साहब और साहब न मानना करनेके लिये यूनियनसे फौजी दो मेरे animata पद देने के गादी तरह वैधानिक राम रहे, और अपनी और फो शेख चाहम और शुन after करने क चला, की या क्या है? यूनिया ने देता है । नाना तो पहले जैसा ही है। यह राजा कमान्य व्यक्तिकी हैसियतसे महाराज्यसे यह मा साहस का है कि वे अपने आप अपने हकों कर दें और हिन्दू राजाको ऐसिदसे वैपाक कर्तव्य पालन करें । अगर इसे जो रावरें मिली हैं, सुनने को भी गलती हो, दो ते सुधारना चाहिये | अगर हिन्दू राजाने फर्ब मारेने मेरे सवाल भूल भरे हों, तो मेरी मलाही वजन देनेकी बात नहीं रन्ती । अगर होल साहब मंत्रिमंडलके मुखियाकी हैसियतसे या चेक बच्चे मुसलमानही हैसियतसे अपना फर्ज पूरा करनेनें गलती करते हों, दो सुन्ह भेक तरफ बैठ जाना चाहिये, और गागडोर अपनेसे बेहतर आदमीके हाथने नौंप देनी चाहिये । आज मीरको भूनिपर हिन्दू धर्म और मिस्तानकी परीक्षा हो रही है। अगर दोनों सही तरीके और भे ही दिशाने काम करें, ३०८