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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३३३

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हिन्दुओंको घर छोड़नेपर मजबूर करते हैं, शुनके घरोमें घुस जाते हैं। अगर वे भैसा करें, तो कौन हिन्दू व रह मना हूँ। तत्र क्या पाकिस्तान ञिस्लामिस्तान हो जायगा। क्या भिसीलिये पाकिस्तान बना है? कोभी हिन्दू वहाँ चैनसे रह ही नहीं सपना, यह दु सकी बात है । विठीचाका मन्दिर पंढरपुरमें विठीयाका मन्दिर है। महाराष्ट्रमें जिससे या मन्दिर कोभी नहीं है। वह मन्दिर हरिजनों के लिये यहाँक ट्रस्टियोंने गुशीसे खोल दिया है, भैसा तार आया था । अब वे लिखते हैं पड़े बड़े ब्राह्मण पुजारी जिसपर नाश है और अनशन कर रहे है। यह सुनकर मुझको बहुत बुरा लगा। में वहाँ जा तो नहीं सहना, मगर यहाँ उदासे कहना चाहता हूँ कि पुजारी लोग अपने आपसे आश्वरके पुजारी मानते हैं, लेकिन वे सच्चे तरीकेसे पूजा नहीं करते। आज तो ये लोगोंको टूटते हैं । विष्णु भगवान से नहीं हैं रिकोभी भी सुनके पास जावे और वे दर्शन न दें । भखरके लिये सब अरु हैं । को सुन पुजारी लोगोंको अनशन छोड़ना चाहिये और कहना चाहिये कि हम सब हरिजनोंके लिये मन्दिर खोलनेमें राम है । हमारी धर्मको मोल खुल गयी है । मन्दिरमें जानेसे पापका नाश होता है, यह माना जाता है। अगर सच्चे दिलसे पूजा करें, तो पापका नाश होगा ही ! असा घोड़े ही है कि पापी मन्दिरमें नहीं जा सकते और पुष्पशाली ही जा सकते हैं । तब वहाँ पाप धुलेंगे किसके जिन हरिजनको हमने ही अछूत बनाया है, वे क्या पापी हो गये । मुझे आशा है कि अनगन करनेवाले समझ जायेंगे कि यह बात कितनी अलगत है । बम्बभीमें रेशनिंग मम्मी चावल बहुत कम मिलते है । भेक हफ्तेमें भेक रतनसे ज्यादा नहीं मिलते। सो लोग काले बाजारसे चावल देते है । अकुश छूटनेपर भी सुख शहरमें अभी राहत नहीं मिली 1. अगर शहरी लोग श्रीमानदार बन जायें, तो ये तक्लीफें मिटनी ही हैं । लोगोंका पेट भर जाय, तो चोरीका कारण ही क्यों रहे ! ३१२ 1