१११ आत्माकी खुराक १-१-२४८ आज भग्रेजो सालका पहला दिन है। आज जितने ज्यादा आदमियोंको यहाँ जमा देखकर मै खुश हूँ । पर मुझे दुख है कि बहनोंको बैठनेको जगह देने में सात मिनट लग गये । (सभा भेक मिनट भी बेकार जानेका मतलब है कि करोड़ों जनताके बहुतसे मिनट वैकार भये, फिर तो हमारा खाना है न भाभियोंको चाहिये कि बहनोंको पहलें जगह देना सीखें। जिस देशमें औरतोंकी भिज्जत नहीं, वह सभ्य नहीं । दोनोंको अपनी मर्यादा सींचनी चाहिये । यही मनु महाराजने बताया है। आजादी मिल जानेके बाद, हम सबको और भी मर्यादाके साथ वरतना चाहिये । मे खम्मीद करता हूँ कि आगे जिससे भी ज्यादा लोग आयेंगे। पर जितने लोग आयें, वे प्रार्थनाको भावना लेकर भावें । क्योकि प्रार्थना ही आत्माकी खुराक है । भगवानके पाससे हमे जो खुराक मिल सकती है, वह और जगह नहीं मिल सकती। मे सुम्मीद करता हूँ कि जो लोग आये है, वे सब यहाँ भी शान्ति रखेंगे और जाते वक्त घरोंको भी अपने साथ शान्ति ले जायेंगे । हरिजन और शराव बू० पी० में हालमें मेक हरिजन कान्फरेन्स हुआ भी । कहते हैं समे से वजीरने हरिजनों को सुपदेश दिया कि आप गन्दे रहना, गन्दे कपड़े पहनना और शराब पीना छोड़ दें। जिनपर कोमरी हरिजन बोल यहा कि जैसे सरकार वाहीके दरख्तोंat arrer fisवा सस्ती है और शराबकी सब दुकानें बन्द करा सकती हैं, वैसे ही वह गन्दे परे भी कुँवा दे। हम नगे रहेंगे, पर गन्दे नहीं। मै झुसे हरिजन मामीको हिम्मतको मराहता हूँ। में तो ताोश गुड़ चना लेता हूँ । पर मैं हॉरेजन भाभियों कहूँगा कि असली मिलान सुनके अपने हार्मोनें ३१६
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