1 अपने घरोंसे निकाला जा रहा है, वह बेभीमानी और असभ्यताका काम है । पहलेसे डरे हुमे मुसलमानोंको घमकार घोंसे बाहर निकालना और फिर झुनके घरोंपर कब्जा कर लेना किसीके लिये अच्छी बात नहीं होगी। जिससे किसीको फायदा नहीं होगा । मैंने सुना है कि आज सरकारने दूसरी जगह शरणार्थियोंको थोड़े मकान देनेका मुभीता किया है, लेकिन वे मुसलमानोंके घरोंपर चच्जा करनेकी जिद करते है । जिससे साफ जाहिर होता है कि शरणार्थी अपनी जरूरतके कारण मुसलमानोंके घरोंपर कब्जा नहीं करते, बल्कि वे चाहते हैं कि दिल्लीसे मुसलमानोंको साफ कर दिया जाय । अगर आम लोग यही चाहते हैं, तो मुसलमानोंको टेटे तरीक्से भगाने के बजाय सुनसे जैसा चाफ क देना कहीं बेहतर होगा। यूनियनको राजधानी में भैसा काम करनेका नतीजा सुन्हे समझ लेना चाहिये । हडतालोका रोग मम्मीकी खबर है कि वहाँ जहान गोदामके और दूसरे मजदूर हस्ताल करनेकी बात सोच रहे है । में सारे लोगों से अपील करता हूँ कि वे हडताल न करें, फिर भले वे काग्रेसी हो, लोगलिस्ट पार्टीक हो--- अगर सोशलिस्ट काग्रेससे अलग माने जा सके या कम्युनिस्ट पाकि हो | आज इन्वालोंका वक्त नहीं है। भैसी हड़तालें हड़ताल करनेवालोंको और सारे देशको नुकसान पहुँचाती हैं । सच्चा लोक-राज औके राजा साहवने अपनी प्रजाको कभी बरस पहले सुत्तरदायी शासन दे दिया था । शुनके पुत्र अप्पा साहचने भी अपनी प्रजाकी सेवाने जिन्दगी लगा दी है। राजा साहब और दूसरे कुछ लोगोने यूनियनमें मिल जाने की योजनाको करीव करीव मान लिया है । खरदार पटेलने कहा है कि राजाओंको पेन्शन मिटेगी, लेकिन मेरा विश्वास है कि भधके राजा साहब प्रजापर बोझ नहीं चलेंगे। जो कुछ मुन्हें मिलेगा, झुसे वे प्रचाकी सेवा करके कमाना चाहेंगे । राजा साहधने मुझे लिखा है कि झुन्होंने अपने राजमें जो पंचायत तरीका बालू किया है, वह क्या राजके यूनियनमें मिल जानेपर भी जारी नहीं रह सकेगा ? राजा साहबसे ३२८ L
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