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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३५४

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पीते । शरावबन्दीका कानून भैसा नहीं कहेगा कि पैसेवाले शराब पियें और हरिजन मजदूर न पियें । विद्यार्थियों में सब पार्टियाँ हैं अक भाभी लिखते हैं कि विद्यार्थियोंकी हड़ताल होनेकी जो बात है, शुसमें काग्रेसी विद्यार्थी शामिल नहीं हैं। यह तो कम्युनिस्ट विद्यार्थियोंको हस्ताल है । विद्यार्थियोंमें भी सब पार्टियाँ होती हैं । कामेसी, कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट वगैरा । मेरी सलाह तो सबके लिये है । काप्रेसके विद्यार्थी हडतालमें शामिल नहीं हैं, तो वे वधाओंके पात्र हैं। मगर कम्युनिस्ट पार्टीके विद्यार्थी हस्ताल कर सकते हैं, यह बात धोये ही है। कम्युनिस्ट भाभी होशियार हैं, वे देशकी सेवा करना चाहते हैं। मगर जिस तरह देशकी सेवा नहीं होती । फिर विद्यार्थी किसी भी पार्टीका पक्ष क्यों दें? विद्यार्थियोंका तो भेक ही पक्ष है । वह है विद्या सीखना । और वह भी देशके खातिर अपना पेट भरनेके लिये नहीं । इवताल सुनके लिये और देशके लिये घातक है । काम निकालनेके दूसरे बहुतसे रास्ते हैं। पहले जब आजादी नहीं मिली श्री, तब हडताल होती थीं। मैंने खुद कभी हड़तालों में हिस्सा लिया है और इन्हे सफल बनाया है। मगर सच हृदताले सचाभीके खातिर होती है, सब महिंसक होती हैं, भैसा भी नहीं । आज हुकूमत हमारे हाथमें है। यह इबतालका मौका नहीं । आज देशको ज्यादा विद्यार्थी और बच्चे विद्यार्थी चाहिये । भिसलिये मेरी झुलसे विनती है कि वे हक्ताल न करें । सत्याग्रह क्यों नहीं ? भेक प्रश्न आया है। अच्छा है । असमें लिखा है कि आप बुरी वस्तुओंका त्याग करवाना चाहते हैं। खुद भी भैंसा करते हैं, यह अच्छा है । तब आप पाकिस्तान जाकर वहाँवालोंसे बुराश्री क्यों नहीं छुड़वाते ? वहाँ जाकर आप सत्याग्रह क्यों नहीं करते 2 यहाँ तो मापने काफी काम कर दिया । अब वहाँ भी जामिये । मैंने जिसका जवाब दे दिया है । माज में किस मुँहसे पाकिस्तान का सकता हूँ ! यहाँ ३३३ ।