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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३५५

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हम पाकिस्तानकी चाल चलें, तो वहाँ के लोगों जाकर मे क्या कहूँ । वहाँ मै तभी जा सकता हूँ, जब हिन्दुस्तान ठीक बन जाय और यहाँके मुसलमानों को कुछ शिकायत न रह जाय । मुझे तो यहीं करना है या मरना है'। दिल्ली में हिन्दू और मिक्स पागल हो गये हैं । वे चाहते है कि यह कि सब मुसलमानोंको हटा दिया जाय। बहुतसे तो चले गये । जो बाकी है मुन्हें भी हटा दें, तो हमारे लिये लज्जाकी बात होगी । पाकिस्तान से हिन्दू-सिक्ख था जाना चाहते हैं, तो वहाँ सत्याग्रह कौन करे ? आज सत्याग्रह हो रहा है ? सत्याग्रह नहीं है, तो महिंसा नी नहीं है । अहिंसाको भी आज कौन मानता है ? आज सबको मिलिटरी चाहिये । हमने मिलिटरीको श्रीधरकी जगह दे दी है। जिसका मतल है कि सब हिंसा के पुजारी बन गये हैं । हिंसा के पुजारी सत्याग्रह कैसे चला सकते है ? मेरी सुनें, तो भाग अखबारों की भी शक्ल बदल जाये । भाज अलवारोंमें कितनी गदगी भरी रहती है । हम सत्याग्रहको भूल गये हैं । सत्याग्रह हमेशा चलनेवाली चीज है। मगर चलानेवाले सत्याग्रही भी तो चाहिये ! 2 यूनियन में साम्प्रदायिकताको जगह नहीं फिर वह भाभी कहते हैं कि जब तक यहासे मुसलमानोंको नहीं निकालेंगे, तब तक पाकिस्तान जो हिन्दू और सिक्स आये हैं, मुनके लिये जगह कहाँते आयेगी ? मे मानता हूँ कि जिनने हिन्दू गौर सिक्ल पाकिस्तान से आये हैं, करीब करीब मुतने मुसलमान यहाँचे चले गये हैं। बाकी जो पडे हैं, सुन्हें हटानेकी चेष्टा हो रही है। यह सब पागलपनकी बात है। हिन्द में मुसलमानोको काफी तादाद पड़ी है । मिसलिमे मौलाना साहबने लखनमें कान्फरेन्स बुलामी थी । शुरुमै ७० हजार लोग आये थे । मिस जमाने में भितनी बड़ी मुसलमानोंकी सभा कहीं नहीं हुमी । मुसके बारेमें मच्छी-बुरी बातें सुनी हैं। मुन्हें मै छोड़ देना चाहता हूँ । यहाँ जो मुसलमान हैं, मुनके प्रतिनिधि इस कान्फरेन्सम गये थे। क्या हम मिन मुसलमानोंको मार डालें या पाकिस्तान मेज दें ? मेरी नरानते असी चीज कभी नहीं निक्लनेवाली है । हमें दुनिया की सुरामियोंकी नक्ल थोड़े ही करनी है ! ३३४