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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३६३

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१२१ प्रार्थना सभा में शान्ति 95-9-'80' फ्ल ही मैंने आप लोगोंको धन्यवाद दिया कि आर्थनामे प आवाज नहीं करते हैं। आवाजसे झगडे नलन नहीं । नगर बहनें आपस में बातें करें, बच्चे चीलें, तो सुन्हें प्रार्थनामें नहीं आना चाहिये । माता यदि बच्चों नान्त रहनेकी तालीम नहीं दे, तो मुन्हें दूर सके रहना चाहिये । औश्वर सब जगह है, जैसा ना है, वर्वशक्तिमान है । हमारी वरदात करता है हम दुरुपयोग न करें | बहनोंते में कहूँगा कि वे को देखकर क्या करेगी? सुसकी भावाज सुनने को भी क्या आना या ? मगर वह ओ बहता है, मुसने कुछ तथ्य है, तो मुसके मुताबिक सय चलें । तब तो कुछ फायदा हो सकता है । मान्ध्रका खत । वह तब इनता । सुमी दयान्त मेरे पास आन्ध्र देशसे अक करुण जत आषा है। मेक भोजवान और क्षेत्र टेन खत है । बूढेकों में जानता हूँ, पर नोजवानको नहीं जानता । वे नोजवान भाभी दिखते हैं कि जबसे १५ अगस्तको आजादी भा गर्मी है, तबते लोगोंको लगने लगा है कि वे नमनानी कर सकते हैं। पहले तो भत्रेजोका डर था । अब किसका डर है । मान्धके लोग सगये हैं । अब भावाद हो गये, से कावूके बाहर हो गये हैं । आबादी पात्रो सुन्होंने भी काफी बलिशम तो दिया है, मगर कानेस मान गिरती जाती है। आज सपको नेता बनना है । पैसे पैदा करनेके प्रयत्न करते हैं । वे लिखते हैं कि तुम यहाँ आकर रहो | मुझे वह अच्छा लगता । मगर कैसे जायूँ ? आन्ध्रके लोगोंको मैं जनता हूँ । मेरे लिये तब जगहें ओक्सी हैं । सारा हिन्दुस्तान मेरा है । में हिन्दुस्तानका हूँ । मगर आज दूसरे काममें पड़ा हूँ। मेरी ૨૪૨