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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३६६

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नहीं। मै हिन्दू, सिक्स और मुसलमानोमें दिली दोस्ती देखनेके लिये तरस रहा हूँ। कल तो भैसी दोस्ती थी। मुसलमानकी जिन्दगी हिन्दू या सिक्सको हुरी, मगर आज चड़े-से-बड़े गोली, या चमसे सुरक्षित नहीं है। यह भैंसी बात है, जिसको कोभी हिन्दुस्तानी देशभक्त ( जो अित नामके लायक है) शान्तिले सहन नहीं कर सकता । अपवासक्का निर्णय मेरे अन्दरसे आवाज तो कभी दिनांसे आ रही थी। मगर मे अपने कान बन्द कर रहा था। मुझे लगता था कि कहीं यह शैतानकी यानी मेरी कमजोरीकी आवाज तो नहीं है । में कमी लाचारी महसूस करना पसन्द नहीं करता । किसी सत्याग्रहीको पसन्द नहीं करना चाहिये । सुपवास तो आखिरी हथियार है । वह अपनी या दूसरोंकी तलवारकी जगह देना है । मुसलमान भाभियोंके जिस सवालका कि भय वे क्या करें? मेरे पास कोभी जनाय नहीं । कुछ समयसे मेरी यह लाचारी मुझे खाये जा रही थी। सुपवास शुरू होते ही यह मिट जावेगी । मे पिछले तीन दिनोंसे जिस बारेमें विचार कर रहा हूँ । आखिरी निर्णय बिजली की तरह मेरे सामने चमक गया है, और मैं श हूँ। वोभी मी अिन्सान, जो पवित्र है, अपनी जानसे ज्यादा कीमती चीज करवान नहीं कर सकता । मे आशा रखता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि मुझमें सुपवास करने लायक पवित्रता हो । नमक, सोडा और सहे नीचूके साथ या मिन चीजोंके वगैर पानी पीनेको छूट में रखूँगा । खपवास क सुबह पहले खानेके बाद शुरू होगा । झुपवासका अरसा अनिश्चित है । और जब मुझे यकीन हो जायगा कि सब कौमोंके दिल मिल गये हैं, और वह बाहर के दवावके कारण नहीं मगर अपना अपना धर्म समझने के कारण, तब मेरा झुपवास छूटेगा । हिन्दुस्तान के मानमें कमी आज हिन्दुस्तानका मान सब जगह कम हो रहा है। ओशियाके हृदयपर और शुसके द्वारा सारी दुनियाके हृदयपर हिन्दुस्तानका साम्राज्य आज देजीसे गायन हो रहा है । मगर मिस सुपवास के निमित्तसे हमारी ३४५