गर्व के साथ पाकिस्तानकी नकल करेगा | अगर में तब जिन्दा हुआ, तो यूनियनवालों कहूँगा कि वे भलानी करनेमें पाकिस्तानले आगे बढ़ें। हम यूनियनचालोंको माग गरनके साथ पहना पड़ता है कि हमने पाकिस्तानको चुरामीकी से नकल की । शुक्वान तो है। और यह जिसी बात के लिये है कि पाकिस्तान और हिन्दुस्तान मलाकी करनेमें अक दूसरेके साथ मुतवला हें | मेरा सपना जब में नौजवान था और पॉलिटिक्स (राजनीति) के बारे कु नहीं जानता था, तबसे मैं हिन्दू-मुसलमान के हृदय क्या सपना देखता आया हूँ । मेरे जीवन 'सभ्यागमें अपने हुन स्वप्नको सिद्ध होते देखकर में छोटे बच्चेी तरह लूँगा । तब पूरी जिन्दगी तक, जिसे हमारे बुजुर्गोंने १२५ साल व्हा है, जो मेरो बाहिन फिर जिन्दा हो जायगी। सनी सिद्धिके लिये अपना कुरबान करना कौन पसन्द नहीं करेगा ? मेरा स्वप्न वेद होगा, तर हमें सन्ना स्वराज मिलेगा । तब कानूनी नगरसे और भूगोल नजरते हम भले दो राज्य रहें, नगर हमारे रोजके जीवनने इन दो नहीं होंगे। हमारा दिल अंक होगा। यह नवारा मेरे लिये और आपके लिये की जितना भव्य है कि वह सच्चा हो नहीं सकता। तो सी और नएहर चित्रकारने मेक नशहूर चित्रनें बताये हुये बच्चेी तरह मुझे त सन्तोष नहीं होगा, जब तक मै झुसे पा न लूँ । जिससे के लिये मैं जिन्दा नहीं हूँ और न जिन्दा रहना चाहता । पाकिस्तानले स्वा पूछनेवाले भाजी, जहाँ तक हो सके, मित के नजदीक पहुँचनेनें मेरी मदद करें । जय हम नक्सटपर पहुँच जाते हैं, सब नह नहीं रहता । मगर शुमके नजदीक अएर वा चरते हैं। हरनेक जिन्यान मित्र मक्सद तक पहुँचने के लायक बन्नेके लिये आत्मशुद्धि करता है। जब मैं १८९६ में दिल्ली या आगरेका फिला देखने गया था, त मैंने वहाँ मेक. दरानेपर यह शेर पढा था, "अगर कहीं जगत है, ते वहीं है, वहाँ है, यहाँ है।" किला अपने जाला बावजूद रा असद न चा । नगर मुझे निहायत जशी होगी, भगर पाकिस्तान भित्र
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