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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/३९१

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न जा सके और वो मुसलमान यहाँले हमारे बरसे और मारपीटसे भागे है और चापस जाना चाहते हैं, वे आरामसे यहाँ न रह सकें ।

बस भितना ही कहूँगा । भीश्वर हम सबको, सारी दुनियाको अच्छी अक्स दे, उन्नति दे, होशियार करे और अपनी तरफ खींच ले, जिससे हिन्दुस्तान और सारी दुनिया सुखी हो । भुपवासका पारणा मैंने सत्यके नामपर यह सुपवास शुरू किया, जिसका जाना-पहचाना नान भीश्वर है । जीते-जागते सलके बिना औश्वर कहीं नहीं है । भीचर नामपर हम झूठ बोले हैं, हमने बेरहमीते लोगोंकी हत्या की हैं और जिसकी भी परवाह नहीं की कि वे अपराधी हैं या निर्दोष, नई हैं या औरतें, बच्चे हैं या सूवै । इमने आहवरके नानपर औरतें और लडकियाँ भगामी हैं, जबरन धर्म-पडला किग है, और यह संघ हमने धेयामीले किया है। मैं नहीं जानता कि कितीने ये खान सत्यके नानपर किये हों । झुसी नामका लुच्चारण करते हुये मैंने अपना सुपाम तो है। हमारे लोगोंका दुख अता था । राष्ट्रपति राजेन्द्रश १०० आदमियोंको लावे, जिनमें हिन्दुओं, मुसलमानों और विक्खोंके प्रतिनिधि थे, हिन्दू -महासभा और राष्ट्रीय स्वयसेवक तबके प्रतिनिधि थे, और पंजाब, सरहदी सूत्रे और विषके शरणार्थियोंके प्रतिनिधि भी थे । मिन्हीं प्रतिनिधियों में पाकिस्तान के हामी कमिश्नर जाहिद हुसेन साहब ये, दिल्लीके चीफ कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर थे और आजाद हिन्द रोजके प्रतिनिधि जनरल शाहनवाज थे । मूर्तिको वरह मेरे पास बैं हुके पति नेहरू और मौलाना साहब भी थे। राजेन्द्रबाबूने मिन प्रतिनिधियों दस्तखतवाला भेक दस्तावेज पढा, जिसमें मुझसे कहा गया कि में झुनपर ज्यादा चिन्ताका योझ न डालें और अपना झुपत्रास छोस्टर सुनके दुस्खको दूर करूँ । पाकिस्तान से और हिन्दुस्तानी भ्रष चार पर तार आगे हैं, जिनमें मुझसे सुपवास होने की अपील को गर्मी है। मैं जिन सारे दोस्तोंकी सलाहका विरोध नहीं कर सका । मैं झुनकी मिस प्रतिज्ञायर अविश्वास नहीं कर सका कि हर हालत ફૈર