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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/४

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प्रकाशकका निवेदन १५ अगस्त, १९४७ के पहले और बादकी अनेक घटनाओंसे भरे हुये दिनोंका अितिहाम आज ही बयान करनेका काम वेवक्तका माना जायगा । फिर भी जितना तो निश्चयके साथ कहा जा सकता है कि fra दिनों गांधीजीने अपनी प्रार्थना सभाओं में मिट्टे होनेवाले श्रोताओंके सामने को प्रवचन दिये थे, वे मिस मितिहासका भेक अमर अध्याय यन जायेंगे । isara प्रार्थनाम अपार श्रद्धा और भक्ति रखनेवाले भिस पुरुषके हृदयसे निकले हुने प्रवचनोंसे सुन दिनोंमें अितिहास रचा गया है। द गाजी अपने क्षेत्र प्रवचनमें कहा है कि " मे जो रोज बोलता जो बहन करता हूँ, वह भी प्रार्थना ही है । " ( पृ० ३१५ ) ghos जिन प्रवचनोंक स्वभावसे तीन भाग किये जा सकते है (५) नोभा खालीको यात्रामं दिये गये प्रवचन, (२) कलकत्ते में दिये गये प्रवचन, और (३) जीवनके अन्तिम दिनोंमें दिल्ली में दिये गये प्रवचन | जिन छोटीसी पुस्तकने गाधीजीके दिल्लीके प्रवचनोका सग्रह किया गया है । दूसरे दो भागोंके प्रवचन भी जल्दी से जल्दी अलग अलग पुस्तकोंमें भिकट्टे करनेका हमारा जिरादा है । जिस मंत्रको स्वds हिन्दुस्तान के लिये गाधीजीका अन्तिम सन्देश कहा जा सकता है । भगवान करे झुनकी कल्पनाके हिन्दुस्तानको प्रत्यक्ष रूप देनेके हमारे प्रयत्नोंमें झुनकी भावना हमेशा हमे बल देती रहे ! अहमदाबाद, २०-३-४८ ३