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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/४०१

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वहावलपुर और सिंध बहावलपुरखालोंने लिखा है कि हमें बल्ली निचटो, नहीं दो त करनेवाले हैं। ने कहता हूँ कि वे घबरायें नहीं । यहाँ दवाव राहने आज भी मुझे तार दिया है कि वे रूप कोशिश करेंगे। मैं सुरुचीको भूल नहीं गया हूँ । के लिपी विक्स भाभियां दरले कतार आया है । चेकहते हैं कि दिने १५००० रिक्त है। इष्टको तो भार ला है । वे १५००० शिवर सुघर पड़े है। झुनकी जान और सुनका मीनान खतरे में है। तुन्हें बहाते निचल्ने वन कीजिये- हामी न्हाते हो कोशिश कीसि । मैं हो यो कहता हूँ, वह बान झुन त से पहुंचेगी। तार देरले पहुँचते हैं। मुझसे यह मरदादत नहीं होगा कि १५००० सिक्ख काटे जायें, या मुचके श्रीमान् मिनार इला हो । दो में ये मिन्तान वो कर सच है यह करूंगा । दूसरे, पडितजी से सदन ध्यान रखते ही है। सिंघ और पाकिस्तानचे सुनको कहूँगा कि वे तिक्तोंको जितमान दिलावें कि जब तक वहीं है, सुनको किसी तरहका खतरा नहीं । अगर वे यह नहीं कर चकले, दो सबको ठोक जगह रखें या हिसके साथ नेम दें। सिक्व चहादुर हैं । सुनके जीनामपर इनका कौर करनेवाला है ! तोि भाली कितनीमान रखें। कुछ पारसी भाभी वहाँ देखने को भेजे हैं। गलत सुकावला सेक भामी शिव है कि नबजाए १९४२ में जेलने थे, तब हमने भी कान कर लिया था । पाचने अगर कहीं आपका जन्त हो गया, सो देशमें सीहिं छूटेगी कि आपका लीवर जी से ठेगा । मिसल नापका सुवास हिंसक होगा। आप पास हो दीजिये । यह बात जेनसे किसी है और अज्ञानते भी । यह सही है कि मेरे जानेके बाद हिंसा हुआ । सुतीका यह नतीजा सुता मनका हाल लड़ेंगे, जिस बारे है । सुस वक्म चार हिन्द अतक रहता, ते कमी न होता । मेरे नरनेसे सर आपत आपने