सी ने सोच लिया है। अश्वरको बचाना होगा, तो बचायेगा । अहिंसा से भरा आदमी मरता है, तो मुसका नतीजा अच्छा ही होगा । पर कृष्ण भगवानके मरनेके बाद यादव ज्यादा भले या पवित्र नहीं हुमे । सब कट कटकर मर गये। तो मे झुसपर रोनेवाला नहीं । भगवानने अिरादा कर लिया है कि जिन्हें मरने दो, तो भैया होगा । लेकिन में दीन, मिसकीन आदमी हूँ । मेरे मरनेसे क्या लदना मारना पर भगवान मिसकीनको भी निमित्त बनाकर न मालूम क्या क्या कर सक्ता है ? कहते हैं भव यहाँके हिन्दू-मुसलमान नहीं देंगे। मुसलमान औरतें भी दिल्लीम घरसे बाहर माने लगी हैं। मुझे खुशी है । मै सबसे कहता हूँ कि अपने अपने दिलको भगवानका मन्दिर बना को 2 1 १३२ २२-१-४८ आप देखते हैं कि आहिस्ता आहिस्ता श्रीश्वरकी तरफसे मुझमें शाक्त गा रही है। सुम्मीद है कि जल्दी पहले जैसा हो जायेंगा | पर यह ओवरके हाथोंमें है । पडित नेहरूका सुदाहरण अक भाभी लिखते है कि जवाहरलालभी, दूसरे वजीर और फौजी अफसर वगैरा सब अपने-अपने घरोंसे कुछ जगह चरणार्थियोंके लिये निकालें, तो भी सुनमें कितने लोग बस सकेंगे ? कहनेवाले ज्यादा हैं, भरनेवाले कम । ठीक है । कुछ हजार ही सुनमे रह सकेंगे। काम भितना महा नहीं, पर करनेनाले भेक मिere area करेंगे | forग्लैण्डके राजा कुछ भी त्याग करें, भेक प्याली चराम भी छोड़ें, सो भी सुनकी कद होती है । सब सभ्य देशो मेसा होता है। सब दुखी लोगोंपर अच्छा असर होता है। अगर दूसरे लोग भी झुनकी तरह करेंगे, तो सुनके ૩
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